मद्रास से तुमने जो कुछ शब्द अपने पत्र में लिखे थे, मुझे बहुत ही अच्छा लगा, कि मैंने तुम्हारे जीवन को धन्य कर दिया। मैं बता नहीं सकता कि उसने मुझे कितना सुकून दिया, क्योंकि मैं हमेशा तुम्हारे प्यार से अभिभूत महसूस करता हूँ, यदि प्यार का कोई खाता होता...क्या मेरे लिए ऐसा हो सकता है कि मैं ये सारे साल तुम्हारे दिल में बिताऊँ और तुम्हारा साथ हो कोई संवाद ना हो।
समय आसानी से गुजर गया, लेकिन यह देखना उतना सुखद नहीं लगता कि हमने एक साथ कितने धन एकत्र कर लिए कई बार हमें तूफानों का सामना करना पड़ा और कई त्रासदीपूर्ण और दु:खद साल भी रहे?