रेत के महल खड़े करने से बचें
- विशाल
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आप अपने सपनों पर पर्दा डालकर वास्तविकता देखना ही नहीं चाहते। कई बार आपको हिंट्स मिलने के बावजूद अपने मन को सकारात्मक रूप से समझा लेते हैं। जिस जगह पर खाली मैदान भी नहीं होगा वहां आपको हवेली देखने का भ्रम पाल लेते हैं।
जिसे आप प्रेमिका समझते हैं वह शायद आपको दोस्त भी समझती है या नहीं, यह जाने बिना ही आप उसके लिए क्या-क्या सपने देखने लग जाते हैं। कभी कोई मित्र आपकी आंखें खोलना चाहे भी तो आपको दोस्त, दोस्त नहीं लगता।
कॉलेज में एक विद्यार्थी हैं अनमोल। उन्होंने कभी किसी लड़की को भाव नहीं दिया। कॉलेज में एक जूनियर इन्हें अच्छी लगी और अनमोल का दिल उस ओर झुका।
एक दिन मौका पाकर उसके सामने प्यार का इजहार भी किया। लेकिन जवाब नकारात्मक मिला। इतना ही नहीं कुछ महीनों के बाद फिर इन्होंने प्रस्ताव रखा। इस बार लड़की ने स्पष्ट बता दिया कि प्यार, इश्क में उसकी कोई रूचि नहीं है।
अब अनमोल जी का मन दुनियादारी में लगता ही नहीं है और इन्हें महसूस होता है कि इनका दिल टूट गया है। अनेक बार दोस्तों ने समझाया भी कि हम तो पहले ही कहते थे मान जाओ लेकिन तुम सुनने को ही राजी नहीं थे।
लड़की तुमको अच्छी लगती है इसका मतलब यह नहीं कि वह भी आपको सहज रूप से स्वीकार कर ले। आप भी उसके केवल आकर्षण में बंधे हो। प्यार नाम की तो कोई चीज है ही नहीं।
मैं यह नहीं कह रहा कि प्यार की दशा में भी अपने संबंधों पर आप सवालिया निशान लगाएं। लेकिन यदि पूर्व में थोड़ी सावधानी रखेंगे। अपने अनुभवी मित्रों की सलाह लेंगे इस बारे में तो अनावश्यक होने वाली परेशानी से बचे रहेंगे।
आप कभी अकेले में मिले नहीं, अनौपचारिक बात नहीं की। केवल अपने दिल में बसी चाहत को प्यार का नाम दे देना गलत है।
पहले जरूरी है कि आप दोनों के बीच संवाद हो। एक-दूसरे को समझें, जानें। इसके बाद किसी निष्कर्ष पर पहुंचे। जल्दबाजी में कुछ हाथ आने वाला नहीं।

