प्यार हु्आ, चुपके से....
हां, यही प्यार है
प्यार की अनुभूति कब, किसे, कैसे हो जाए- यह कहा नहीं जा सकता है। प्रेम करने वाले रूमानी दुनिया में पहुंच जाते हैं। काल्पनिकता के घोड़ों पर सवार होकर मानो दूसरी दुनिया की सैर करने लगते हैं। उनका इस दुनिया से नाता टूट-सा जाता है। वे स्वयं से बातें करने लगते हैं... अपने अंदर जादू-सा परिवर्तन महसूस करते हैं। यहां प्यार हो जाने के कुछ लक्षण बताए जा रहे हैं। यदि इनमें से कुछ लक्षण आप में भी हैं... तो समझें आपको भी प्यार हो गया।* आप खोए-खोए से रहने लगे हैं, लोगों से मिलने-जुलने, बातचीत कम करने लगे हैं। * हर पल बेचैनी-सी महसूस हो, सब कुछ होकर भी बहुत कुछ कमी-सी महसूस हो। * आप बिना किसी बात के या किसी बात को मन ही मन सोचकर स्वयं ही मुस्कुराते रहते हैं। * जब आपको अपने आपसे बातें करने का मन करने लगे।... * सपाट जमीन पर चलते-चलते आपको ठोकर लग जाती हो या राह चलते आप फिसल जाते हों। * चलते-चलते खुद-ब-खुद कदम बहकने लगें। * उसका जिक्र होने पर आपको प्यार की खुशबू आने लगे। * उसका नाम सुनते ही तन-बदन में खुशी की लहर दौड़ जाती हो। दिल बाग-बाग हो उठता हो। * आंखें बंद करते ही आंखों के सामने वह आ जाए। * जब होंठ खामोश रहें बहुत कुछ कहने के लिए। * जब हंसते-हंसते आंखें नम हो जाए। * अपनी जिंदगी की हर बात को उनसे जोड़ने लगें। * छत, बालकनी या कहीं और घंटों खड़े होकर उसका इंतजार करने लगें यह सोचकर, शायद वह यहां से गुजरे और उसका दीदार हो जाए।