ऑफिस में रोमांस, ना आए रास
दफ्तर में प्यार, स्वीकार या इंकार!
नंदिनी रायकवार दस साल पहले एक ही दफ्तर में काम करने वाले रीना और आदित्य को एक-दूसरे से प्यार हो गया। मामला जब धीरे-धीरे मैनेजमेंट के समक्ष पहुंचा तो दोनों को बुलाकर कह दिया गया कि दोनों में से किसी एक को इस्तीफा देना होगा। लिहाजा आदित्य ने इस्तीफा दिया और दूसरी नौकरी ढूंढने के बाद रीना से शादी की। हाल ही में सुजय को अपनी ही सबॉर्डिनेट अक्षिता से प्यार हुआ। चूंकि सुजय बॉस है इसलिए हो ये रहा है कि अक्षिता को किसी भी समय आने-जाने की छूट मिली हुई है। जिस काम से उसे बचना होता है, वो काम किसी और के सिर आ जाता है। जो उसने किया न हो, उसका श्रेय उसे मिल जाता है। जो उसे अपने प्रतिस्पर्धी लगते हैं, उनकी शिकायतें होती हैं और उन्हें काम करने के बावजूद डांट पड़ती है। इससे दफ्तर का माहौल तनावपूर्ण और अनुशासन भंग की स्थिति बनी हुई है।दफ्तर में रोमांस या अफेयर या फिर प्रेम संबंध हमारे देश में अभी बहुत आम न हुआ हो, लेकिन जिस अनुपात में लड़कियां काम करने के लिए बाहर निकल रही हैं, उससे ये बहुत दूर की कौड़ी भी नहीं लगती है। दफ्तर आजकल बनते ही ऐसे हैं कि प्राइवेसी भी मिल जाती है। फिर कॉलेज से निकलते ही काम करते युवाओं के बीच जब संवाद रहेगा तो आकर्षण और प्रेम होना कोई ऐसा अजूबा तो नहीं होगा। हां, लेकिन इसके पक्ष और विपक्ष पर जरूर चर्चा होती रहती है। कुछ के लिहाज से ये ऐसा बुरा भी नहीं है, लेकिन कुछ के अनुसार इससे कंपनी के काम का नुकसान तो होता ही है, सहकर्मियों का व्यवहार भी बदल जाता है। कुछ साल पहले यदि ऐसा होता तो या तो दोनों में से किसी एक को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ता या फिर प्यार से...। लेकिन इन कुछ सालों में परिदृश्य थोड़ा बदला है। एक तो ये बहुत स्वाभाविक भावना है, जिसे किसी भी सूरत में नियंत्रित नहीं किया जा सकता है, दूसरे योग्य और कुशल कर्मचारियों को इस वजह से काम छोड़ना पड़े ये शायद कंपनियों को बहुत रुचता नहीं है।
इस बारे में हरेक की अपनी-अपनी राय रहती है। किसी के अनुसार यदि ये कार्यस्थल के माहौल, अनुशासन, कार्यशैली और उत्पादकता को प्रभावित नहीं करता है, तो इसमें संस्थान प्रमुख को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए, संस्थान का फोकस सिर्फ अपने काम, अनुशासन और माहौल पर होना चाहिए, लेकिन हर कोई इस राय से सहमत नहीं है, क्योंकि हकीकत में इसके दुष्परिणाम सामने नजर आते हैं। यदि बॉस का ही प्रेम संबंध चल रहा है तो अनावश्यक पक्षपात होना ही है। प्रमोशन, वेतनवृद्धि तो बहुत आगे की बात है, लेकिन अनुशासन में लचीलापन, काम करने के तरीके और श्रेय देने के मामले में पक्षपात इन मामलों में बहुत सामान्य स्थिति है, लेकिन यदि ऐसा नहीं होता है तो फिर इसमें कोई बुराई ही नहीं है, क्योंकि आखिरकार कामकाजी इंसान अपने दिन का और कालांतर में जिंदगी का लंबा हिस्सा अपने-अपने कार्यस्थल पर जो बिताता है।