उड़न तश्तरी की हकीकत, कितनी सही कितनी झूठ

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स्टोनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पीटर स्टार्क और प्रो. वोन आर. ईशलमैन के नेतृत्व में एक कांफ्रेस आयोजित गई थी। दो दशक पहले आयोजित इस सम्मेलन में उन 8 खगोल वैज्ञानिकों को बुलाया गया था जिन्होंने उड़न तश्तरी के बारे में ठोस दावे किए थे।

हालांकि सम्मेलन के अंत में यही रिपोर्ट जारी की गई कि ऐसी अनोखी घटनाओं के बारे में विज्ञान को और अधिक अध्ययन करने की आवश्यकता है। इससे पहले भी उड़न तश्तरियों पर अमेरिका के साथ ही रूस, स्वीडन, फ्रांस, बेल्जियम ब्राजील, चिली, मैक्सिको आदि देशों में अध्ययन किए गए थे।

स्पेन के वैज्ञानिकों ने तो अपने अध्ययन में ऐसे करीब 6 हजार दावों को तर्क की कसौटी पर परखा और अमेरिका को इस मामले में मनगढ़ंत अफवाहें फैलाने का दोषी भी माना। हालांकि ऐसे अध्ययन जारी रहे।

वर्ष 1968 में ईडवर्ड कान्डान के कोलोराडो परियोजना में भी कोई ठोस नतीजा हाथ नहीं आया। उन्होंने अनेक प्रत्यक्षदशियों और खगोल वैज्ञानिकों के साथ अध्ययन करके कहा था कि विज्ञान को अभी और ठोस सबूतों की जरूरत है।

इसके दो साल बाद खगोल विज्ञान का अध्ययन करने वाली अमेरिकी इंस्टीट्यूट एआईएए की रिपोर्ट में भी ऐसी घटनाओं के उच्चस्तरीय अध्ययन की जरूरत पर जोर दिया गया था।
नई दिल्ली| Last Updated: गुरुवार, 2 जुलाई 2020 (12:22 IST)

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