जंजाल न बन जाए यह तकनीक का जाल
राष्ट्रीय तकनीकी दिवस विशेष
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जहाँ एक ओर तकनीक का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल हमारे स्वास्थ्य से खिलवा़ड़ करता है, वहीं दूसरी ओर बढ़ते अपराधों के पीछे भी तकनीक का ही हाथ है। आज के समय में लूट, चोरी, धोखाध़ड़ी जैसी शायद ही कोई घटना हो जिसमें तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा हो। तकनीक की अति हमारे लिए किस तरह घातक साबित हो सकती है? इससे क्या परेशानियाँ हो सकती हैं और इसके दुरुपयोग से कैसे बचा जा सकता है?
हर स्तर पर घातक
जीएसआईटीएस के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. राकेश सक्सेना ने बताया कि मोबाइल टावर्स के बीच तय मानकों से ज्यादा इंटेन्सिटी है, जो सभी के लिए घातक है। मोबाइल पर ज्यादा बात करने के कारण बच्चे छोटी उम्र में ही ऊँचा सुनने लगे हैं।
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तकनीक ही सायबर क्राइम का आधार
स्कूल ऑफ कम्प्यूटर साइंस के विभागाध्यक्ष डॉ. एके रमानी ने बताया कि हर तकनीक की कोई न कोई कमजोरी होती है और इसी का फायदा उठाकर बिग़ड़ी मानसिकता के लोग अपराध करते हैं, क्योंकि उनका शोध आम आदमी से ज्यादा मजबूत होता है। इनसे बचने के लिए नवीनतम तकनीक पर आधारित एंटीवायरस का उपयोग किया जाना चाहिए। वायरस, हैकिंग और अन्य किस्म के सायबर क्राइम से बचने के लिए कम्प्यूटर ऑन करने से लेकर हर स्तर पर सावधानी बरतने की जरूरत है।
गर्भ में ही बच्चे को नुकसान
कम्प्यूटर और लैपटॉप का ज्यादा उपयोग काफी घातक साबित होता है। खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के लिए। गर्भावस्था में लैपटॉप या कम्प्यूटर का ज्यादा इस्तेमाल गर्भस्थ शिशु को शारीरिक व बौद्धिक तौर पर विकलांग बना सकता है। कम्प्यूटर से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स निकलती हैं, जो गर्भवती महिलाओं और गर्भस्थ शिशु को काफी नुकसान पहुँचा सकती हैं। मोबाइल का ज्यादा उपयोग ब्रेन कैंसर का कारण भी बन सकता है। जरूरी न होने बात न करें तो बेहतर है। एसएमएस का उपयोग करके ज्यादा बातें करने से बचा जा सकता है।
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तकनीकी संसाधनों के उपयोग की अति लोगों को समय से पहले ही बू़ढ़ा बना रही है। न्यूरो सर्जन डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि कम्प्यूटर, लैपटॉप, टीवी, मोबाइल आदि संसाधनों के कारण युवा उन बीमारियों के शिकार हो रहे हैं, जो बुढ़ापे में होती हैं। इनमें सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइसिस, आँखों की कमजोरी, साइटिका, ब्रेन कैंसर आदि शामिल हैं। इसी के साथ अनिद्रा, थकान, सुस्ती आदि बीमारियाँ भी बढ़ती जा रही हैं। इन बीमारियों से बचने के लिए इन साधनों का उपयोग सीमा में रहकर करना चाहिए।
तकलीफ से बचने के नुस्खे अपनाएँ
* गोपनीय दस्तावेज बनाते समय इंटरनेट का कनेक्शन पूरी तरह हटा दें। इंटरनेट कनेक्ट होने पर दस्तावेज चोरी हो सकता है
* इंटरनेट कनेक्ट करने से पहले कम्प्यूटर पर मौजूद जरूरी दस्तावेजों को पूर तरह सुरक्षित कर लें
* सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अनजान लोगों के संपर्क में आने से बचें
* मोबाइल, लैपटॉप और कम्प्यूटर पर कम से कम बात करें, इससे गंभीर बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है
* इंटरनेट बैंकिंग और अन्य लेन-देन में सावधानी रखें
* इंटरनेट बैंकिंग से जु़ड़ी सावधानियों की जानकारी अधिकारियों से लें और अच्छी तरह समझ लेने के बाद ही काम शुरू करें
* कम से कम क्रेडिट कार्ड रखें और जरूरी होने पर ही इस्तेमाल करें
* कम्प्यूटर की सुरक्षा के लिए नवीनतम और अपडेट एंटीवायरस का उपयोग करें
* एक कॉल पर मोबाइल से लंबे समय तक बात न करें।
