US rescues pilot in Iran : हॉलीवुड एक्शन मूवी स्टाइल में अमेरिकी पायलट का रेस्क्यू, ईरान में चला खतरनाक ऑपरेशन, पढ़िए पूरी कहानी
ईरान में चल रहे संघर्ष के बीच एक अमेरिकी लड़ाकू विमान के क्रैश के बाद शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन आधुनिक युद्ध इतिहास के सबसे जटिल अभियानों में से एक बन गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस ऑपरेशन के दौरान अतिरिक्त चुनौतियां भी सामने आईं, जिनमें ईरानी हमले में ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और A-10 Thunderbolt II को नुकसान पहुंचना शामिल है। अमेरिकी सेना ने भीषण गोलीबारी के बीच ईरान में घुसकर एयरमैन की जान बचा ली है। ईरान ने एफ-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया था और उसके बाद दो पायलट ईरानी जमीन पर थे। ट्रंप ने कहा कि हमारे दोनों पायलट बचा लिए गए हैं।
घटना उस समय शुरू हुई जब एक F-15E Strike Eagle दुश्मन क्षेत्र में गिर गया। विमान के दो क्रू मेंबर अंधेरे में इजेक्ट हो गए। इनमें से एक सुरक्षित निकल गया, जबकि दूसरा पहाड़ी इलाके में फंस गया, जहां चारों ओर दुश्मन बल सक्रिय थे। यह कोई फिल्मी दृश्य नहीं, बल्कि वास्तविक युद्ध की घटना थी। बाद में सैन्य अधिकारियों ने इसे 'अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशंस के इतिहास के सबसे चुनौतीपूर्ण और जटिल मिशनों में से एक' बताया।
कैसे शुरू हुआ ऑपरेशन
इस ऑपरेशन की शुरुआत तब हुई जब सप्ताह की शुरुआत में ईरान के अंदर अमेरिकी F-15E पर फायरिंग हुई, जिससे दोनों क्रू मेंबर को इजेक्ट होना पड़ा। एक पायलट को कुछ ही घंटों में सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन दूसरा क्रू मेंबर- जो वेपन सिस्टम्स ऑफिसर था- घायल अवस्था में पहाड़ी इलाके में फंस गया। उसके पास सीमित सर्वाइवल उपकरण ही मौजूद थे।
रिटायर्ड मेजर जनरल मार्क मैककार्ली के अनुसार, घायल एयरमैन को कई ईरानी बलों से बचते हुए छिपना पड़ा, क्योंकि उसे पकड़ने के लिए इनाम तक घोषित किया गया था। हालांकि, वह पूरी तरह अकेला नहीं था। अधिकारियों के मुताबिक, उसके पास एक ट्रैकिंग बीकन और सुरक्षित संचार उपकरण था, जो लगातार उसकी लोकेशन अमेरिकी कमांड सेंटर तक भेज रहा था। यही तकनीक रेस्क्यू मिशन की रीढ़ बनी।
दो सेनाओं के बीच रेस
इसके बाद जो हुआ, वह सिर्फ एक बचाव अभियान नहीं बल्कि समय के खिलाफ एक दौड़ बन गया। अमेरिका की सेना जहां तेजी से अपने सैनिक को खोजने और निकालने में जुटी थी, वहीं इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (Islamic Revolutionary Guard Corps) ने भी उसी इलाके में समानांतर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया।
Axios की रिपोर्ट के अनुसार दोनों पक्ष एक ही क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे, जिससे यह ऑपरेशन खुफिया जानकारी, गति और सैन्य ताकत की हाई-स्टेक्स प्रतिस्पर्धा में बदल गया। इस दौरान हालात इतने संवेदनशील थे कि किसी भी चूक से मिशन विफल हो सकता था और बड़ा सैन्य टकराव हो सकता था।
पायलट को बचाने में अमेरिका के 2 और प्लेन ध्वस्त
इनमें से एक C-130 'Hercules' था। प्लेन बचाव दल के 'Commando' को लेकर गया था, लेकिन प्लेन ईरान के किसी रिमोट क्षेत्र पर सभी 'Commando' को उतारने के थोड़ी देर बाद दुश्मनों से घिर गया और उड़ नहीं पाया। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि पायलट को बचाने के बाद अमेरिकी सेना ने दोनों प्लेन खुद ही ब्लास्ट कर दिए और रेस्क्यू के लिए आए तीन नए लड़ाकू विमान से पायलट को लेकर निकल गए। बचाने के क्रम में 'Commandos' और 'IRGC' के बीच भीषण लेकिन छोटी लड़ाई भी हुई, अमेरिकी पायलट एक घर में छुपा था जिस तक पहुंचने में पहले अमेरिकी सेना सफल रही।
पहाड़ी इलाके में बेहद जटिल ऑपरेशन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दक्षिणी ईरान में डाउन हुए F-15E Strike Eagle के वेपन्स सिस्टम ऑफिसर (WSO) को सुरक्षित निकालने के लिए अमेरिका ने बेहद जटिल ऑपरेशन चलाया। इस मिशन में सैकड़ों स्पेशल फोर्सेज, SEAL Team Six के कमांडो, फाइटर जेट्स, हेलिकॉप्टर्स, और साइबर व स्पेस इंटेलिजेंस शामिल थे। सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, यह ऑपरेशन 'अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन के इतिहास के सबसे कठिन मिशनों में से एक' था जिसमें पहाड़ी इलाका, घायल एयरमैन और तेजी से बढ़ती ईरानी फोर्सेज के कारण चुनौती और बढ़ गई।
WSO ने 24 घंटे से ज्यादा समय तक ईरानी बलों से बचते हुए पहाड़ों में मूव किया और कम्युनिकेशन एस्टेब्लिश किया, इस बीच अमेरिकी एयरक्राफ्ट ने ईरानी मूवमेंट को रोकने के लिए एयरस्ट्राइक और फायरिंग की। ऑपरेशन का अंतिम चरण भी कम चैलेंजिंग नहीं था। रेस्क्यू के बाद वापसी के लिए आए दो ट्रांसपोर्ट विमान खराब हो गए। बाद में तीन नए विमान भेजकर सभी को सुरक्षित निकाला गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक खराब विमानों को IRGC के हाथ लगने से रोकने के लिए नष्ट कर दिया गया। Edited by : Sudhir Sharma
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