Iran-US Peace Talks : ईरान-अमेरिका शांति वार्ता के दूसरे राउंड को लेकर नाटकीय घटनाक्रम चल रहा है। ईरान कभी हां करता है तो कभी ना। अमेरिका भी तरह-तरह के दावे कर रहा है।ऐसे में देखना ये है कि पाकिस्तान किस तरह से दोनों को आमने-सामने बैठा पाता है। अब अमेरिका-ईरान की सीधी वार्ता की सभी संभावनाएं इस बात पर निर्भर करती हैं कि क्या पाकिस्तान ईरान के विदेश मंत्री को मना पाया है? ईरान के प्रतिनिधिमंडल को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ और मुनीर ने मनाने की पूरी कोशिश की, लेकिन शायद बात नहीं पाई। ईरान के विदेश मंत्री अराघची आज रात इस्लामाबाद से मॉस्को के लिए रवाना हो गए।
क्या पाकिस्तान ईरान के विदेश मंत्री को मना पाया है?
ईरान-अमेरिका शांति वार्ता के दूसरे राउंड को लेकर नाटकीय घटनाक्रम चल रहा है। ईरान कभी हां करता है तो कभी ना। अमेरिका भी तरह-तरह के दावे कर रहा है।ऐसे में देखना ये है कि पाकिस्तान किस तरह से दोनों को आमने-सामने बैठा पाता है। अब अमेरिका-ईरान की सीधी वार्ता की सभी संभावनाएं इस बात पर निर्भर करती हैं कि क्या पाकिस्तान ईरान के विदेश मंत्री को मना पाया है?
ईरान के प्रतिनिधिमंडल को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ और मुनीर ने मनाने की पूरी कोशिश की, लेकिन शायद बात नहीं पाई। ईरान के विदेश मंत्री अराघची आज रात इस्लामाबाद से मॉस्को के लिए रवाना हो गए। अगर पाकिस्तान ईरान को कुछ ऑफर कर पाया तो अराघची सोमवार को अमेरिका-ईरान की सीधी वार्ता के लिए इस्लामाबाद लौट सकते हैं।
अब बस यही एक उम्मीद है
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बैठकों की अब यही संभावित रूपरेखा है, जो पूरी तरह से ईरान के विदेश मंत्री के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी। अब बस यही एक उम्मीद है कि सोमवार को बातचीत हो सके। वरना जंग बढ़नी तय है। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की आखिरी तारीख पार हो चुकी है। हालांकि अभी तक दोनों ही देश दूसरी बार बातचीत के लिए एक ही टेबल पर साथ नहीं आ पाए हैं।
अमेरिका का डेलिगेशन इस वक्त पाकिस्तान में है। वहीं ईरान की तरफ से भी डेलिगेशन आया है, लेकिन पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक ईरानी डेलिगेशन अमेरिका के साथ दूसरे दौर की बात करने को तैयार नहीं है। उसने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने एक बड़ी शर्त रखी है। दरअसल ईरानी डेलिगेशन ने स्पष्ट कह दिया है कि अमेरिका के साथ दूसरे दौर की बातचीत तब तक नहीं हो सकती है, जब तक वह अपना नेवल ब्लाकेड स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से नहीं हटा देता है।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से लौट गया
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के नेतृत्व वाला ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के तीनों सेनाओ के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की अध्यक्षता वाले डेलीगेशन के साथ मुलाकात करके एक लिखित फ्रेमवर्क भी दे चुका है। अमेरिकी दूत शनिवार को ईरान के साथ शांति वार्ता का एक नया दौर शुरू करने के लिए रविवार को इस्लामाबाद पहुंचने वाले थे, मगर उससे पहले ही ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से लौट गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को इस्लामाबाद ईरान से वार्ता के लिए भेजा था।
पहले भी इसी बात पर मामला अटक गया था
अब ट्रंप कह रहे हैं कि उन्होंने अपने दूतों को जाने से पहले ही रोक लिया।ईरानी प्रतिनिधिमंडल में शामिल विदेश मंत्री अब्बास अराघची, उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी, राजदूत रजा अमीरी मोघदम और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई शुक्रवार देर रात इस्लामाबाद पहुंचे थे और शनिवार रात लौट गए। हालांकि अब भी वार्ता की एक उम्मीद बाकी है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह से बंद कर दे, लेकिन ईरान इसके लिए तैयार नहीं है। पहले दौर की बातचीत के दौरान भी इसी बात पर मामला अटक गया था।
इसके साथ-साथ होर्मुज के मसले पर भी बात नहीं बन पायी थी। अब ईरान का कहना है कि दूसरे दौर की बात तभी होगी जब होर्मुज से अमेरिकी नेवी हट जाएगी। मेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूतों को युद्ध समाप्त करने के लिए ईरानी अधिकारियों से बातचीत जारी रखने के लिए पाकिस्तान नहीं जाने का आदेश दिया है। राष्ट्रपति ने कहा, मैंने अपने दूतों से कुछ देर पहले कहा कि वे जाने की तैयारी कर रहे हैं, और मैंने उनसे कहा, नहीं, आप वहां जाने के लिए 18 घंटे की उड़ान नहीं भरेंगे।
वे जब चाहें हमें फोन कर सकते हैं
हमारे पास सारे विकल्प मौजूद हैं। वे जब चाहें हमें फोन कर सकते हैं, लेकिन आप अब और 18 घंटे की उड़ान भरकर व्यर्थ की बातें करने नहीं जा रहे हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 2 सप्ताह पहले इस्लामाबाद में वार्ता के पहले दौर का नेतृत्व किया था, फिलहाल वो इसमें शामिल नहीं होंगे, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर पाकिस्तान जाने के लिए तैयार हैं। ईरान के डेलिगेशन से उसी पाकिस्तानी डेलीगेशन ने बातचीत की है जो कि तेहरान गया था। इसमें DG-ISI लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मलिक, DGMO काशिफ अब्दुल्ला, गृहमंत्री मोहसिन नकवी और आसिम मुनीर के प्राइवेट सेक्रेटरी मेजर जनरल सैयद जवाद तारिक शामिल थे।
अगर ईरानी डेलीगेशन की बात करें तो इसमें विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अलावा उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई और पाकिस्तान में ईरानी राजदूत रेज़ा अमीरी मोघदम शामिल थे। अराघची ने पाकिस्तान को ईरान की शर्तें और अमेरिकी मांगों पर अपनी आपत्तियां भी सौंप दी हैं। ईरान ने अमेरिका से सीधे बातचीत करने से इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने कहा कि ईरान अपनी बात पाकिस्तान के जरिए ही अमेरिका तक पहुंचाएगा।
Edited By : Chetan Gour