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Last Modified: जर्काता , मंगलवार, 3 मार्च 2026 (12:36 IST)

चंद्र ग्रहण से पहले भूकंप से थर्राया इंडोनेशिया, जानिए तीव्रता

earthquake in indonesia before chandra grahan
Earthquake in Indonesia : चंद्र ग्रहण से पहले मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे महायुद्ध के बीच इंडोनेशया में मंगलवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6.2 मापी गई।
 
इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के पास भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। नेशनल सेंटर फोर सिस्मोलॉजी के मुताबिक, इंडोनेशिया में मंगलवार को भूकंप सुबह 10 बजकर 26 मिनट पर आया है। इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.2 मापी गई है। वहीं, इसका केंद्र धरती से 20 किलोमीटर की गहराई में बताया जा रहा है। मंगलवार को चंद्र ग्रहण के दिन आए भूकंप के कारण अब तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान की तत्काल कोई खबर सामने नहीं आई है।

क्या ग्रहण से है भूकंप का कनेक्शन

आज 2026 का पहला चंद्र ग्रहण है। इससे पहले भी कई बार ग्रहण के आसपास बड़े भूकंप आए हैं। 8 अप्रैल 2024 को सूर्य ग्रहण के पहले अमेरिका के ईस्ट कोस्ट में बड़ा भूकंप आया था। मार्च 2025 में भी सूर्य ग्रहण से एक दिन पहले म्यांमार में 7.7 की तीव्रता का भूकंप आया था। हालांकि वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्रहण और भूकंप का कोई डायरेक्ट कनेक्शन नहीं है। ये दोनों घटनाएं अलग अलग प्राकृतिक प्रक्रियाओं का परिणाम है। 

कैसे आता है भूकंप?

हमारी धरती मुख्य तौर पर 4 परतों से बनी हुई है- इनर कोर, आउटर कोर, मैन्टलऔर क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल को लिथोस्फेयर कहते हैं। ये 50 किलोमीटर की मोटी परत वर्गों में बंटी हुई है जिन्हें टैकटोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये टैकटोनिक प्लेट्स अपनी जगह से हिलती रहती हैं। लेकिन जब ये बहुत ज्यादा हिल जाती हैं तो भूकंप आ जाता है। ये प्लेट्स क्षैतिज और उर्ध्वाधर दोनों ही तरह से अपनी जगह से हिल सकती हैं। इसके बाद वे अपनी जगह तलाशती हैं और ऐसे में एक प्लेट, दूसरी के नीचे आ जाती है।

कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता?

भूकंप की तीव्रता मापने के लिए रिक्टर स्केल का पैमाना इस्तेमाल किया जाता है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। भूकंप की तरंगों को रिक्टर स्केल 1 से 9 तक के आधार पर मापता है। रिक्टर स्केल पैमाने को सन् 1935 में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी में कार्यरत वैज्ञानिक चार्ल्स रिक्टर ने बेनो गुटेनबर्ग के सहयोग से खोजा था।
 
इस स्केल के अंतर्गत प्रति स्केल भूकंप की तीव्रता 10 गुना बढ़ जाती है और भूकंप के दौरान जो ऊर्जा निकलती है, वह प्रति स्केल 32 गुना बढ़ जाती है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि 3 रिक्टर स्केल पर भूकंप की जो तीव्रता थी, वह 4 स्केल पर 3 रिक्टर स्केल का 10 गुना बढ़ जाएगी। रिक्टर स्केल पर भूकंप की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 8 रिक्टर पैमाने पर आया भूकंप 60 लाख टन विस्फोटक से निकलने वाली ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है।
 
भूकंप को मापने के लिए रिक्टर के अलावा मरकेली स्केल का भी इस्तेमाल किया जाता है, पर इसमें भूकंप को तीव्रता की बजाए ताकत के आधार पर मापते हैं। इसका प्रचलन कम है, क्योंकि इसे रिक्टर के मुकाबले कम वैज्ञानिक माना जाता है। भूकंप के कारण होने वाले नुकसान के लिए कई कारण जिम्मेवार हो सकते हैं, जैसे घरों की खराब बनावट, खराब संरचना, भूमि का प्रकार, जनसंख्या की बसावट आदि।
edited by : Nrapendra Gupta