महर्षि वेदव्यास के 30 अनमोल विचार, जो आपकी जिंदगी बदल देंगे...


Author राजश्री कासलीवाल|
 
8.  जहां कृष्ण हैं, वहां धर्म है और जहां धर्म है, वहां जय है।
 
9.  जिसके मन में संशय भरा हुआ है, उसके लिए न यह लोक है, न परलोक है और न सुख ही है।
 
10.  अत्यंत लोभी का धन तथा अधिक आसक्ति रखने वाले का काम- ये दोनों ही धर्म को हानि पहुंचाते हैं।
 
11.  जिस मनुष्य की बुद्धि दुर्भावना से युक्त है तथा जिसने अपनी इंद्रियों को वश में नहीं रखा है, वह धर्म और अर्थ की बातों को सुनने की इच्छा होने पर भी उन्हें पूर्ण रूप से समझ नहीं सकता।
 
12.  क्षमा धर्म है, क्षमा यज्ञ है, क्षमा वेद है और क्षमा शास्त्र है। जो इस प्रकार जानता है, वह सब कुछ क्षमा करने योग्य हो जाता है।
 
13.  मन में संतोष होना स्वर्ग की प्राप्ति से भी बढ़कर है, संतोष ही सबसे बड़ा सुख है। संतोष यदि मन में भली-भांति प्रतिष्ठित हो जाए तो उससे बढ़कर संसार में कुछ भी नहीं है। 
 
14.  दुख को दूर करने की एक ही अमोघ औषधि है- मन से दुखों की चिंता न करना।
 
 

 

और भी पढ़ें :