शर्मनाक! 6 घंटे तक अस्पतालों में भटकती रही रेप पीड़िता
आए दिन होती है बदइंतजामी, अस्पतालों में क्यों पूरी नहीं हो रही डॉक्टरों की कमी?
प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं किस हद तक चरमराई हुई हैं, इसका अंदाजा इंदौर में हुई एक घटना से लगाया जा सकता है। बुधवार को इंदौर में एक रेप पीड़िता करीब 6 घंटे तक अपनी मेडिकल जांच के लिए अस्ततालों के चक्कर काटती रही, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। 5 से 6 घंटे दो अस्पतालों के बीच भटकने के बाद देर शाम उसका मेडिकल हो सका।
जब जिम्मेदारों से इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने हर बार की तरह अस्पतालों में स्टाफ की कमी का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। एक तो दुष्कर्मियों की हैवानियत की शिकार ऊपर से सरकारी बदइंतजामी का दंश। ऐसे में रेप पीड़िता पर दिनभर क्या गुजरी ये तो वही जानती है। डॉक्टर उसे मेडिकल जांच के लिए अस्पताल-अस्पताल भटकाते रहे। पीसी सेठी अस्पताल पहुंची तो मेडिकोलीगल केस (एमएलसी) का हवाला देकर एमटीएच अस्पताल भेज दिया। देर शाम उसका मेडिकल हो सका।
मेडिकल के लिए इंदौर लाए थे : दरअसल, इंदौर से सटे खुड़ैल थाना क्षेत्र में एक युवती दुष्कर्मियों का शिकार हो गई। जिसके बाद पीड़िता ने खुड़ैल थाना में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत के बाद उसका मेडिकल होना था, जिसके लिए उसे इंदौर लाया गया। महिला पुलिसकर्मी के साथ सुबह 9:30 बजे पीसी सेठी अस्पताल लाया गया। लेकिन यहां कोई ड्यूटी डॉक्टर मौजूद नहीं था। आन-कॉल महिला डॉक्टर भी अनुपस्थित थी। इसके बाद उसे एमटीएच अस्पताल भेजा गया, लेकिन वहां भी उसे लौटा दिया गया।
यहां कोई डॉक्टर नहीं मिला : पीड़िता करीब 1 बजे दोबारा पीसी सेठी अस्पताल पहुंची, लेकिन वहां भी कोई डॉक्टर नहीं मिला। स्टाफ ने बताया कि डॉक्टर दोपहर 2:30 बजे आएंगे। आखिरकार 3 बजे के बाद ही महिला का मेडिकल किया गया। इस दौरान पीड़िता इतनी हताश हो गई कि उसने कह दिया कि शायद मामला दर्ज न कराते तो ही अच्छा था।
डॉक्टरों के तर्क कैसे कैसे : इस पूरी बदइंतजामी के जब स्वास्थ्य अधिकारियों से सवाल पूछे गए तो तरह तरह के तर्क देकर पल्ला झाड लिया गया। पीसी
सेठी अस्पताल के
प्रभारी डॉ. वीरेंद्र राजगीर ने बताया कि अस्पताल में सिर्फ 5 महिला चिकित्सक हैं, जिनमें से दो अवकाश पर थीं, जिससे यह समस्या हुई। हमने डॉक्टरों की कमी को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत कराया है।
सीएमएचओ डॉ. बीएस सैत्या ने बताया कि पीसी सेठी अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण मेडिकल में देरी हुई। पीजी की तैयारी के चलते कई डॉक्टर सेवा से हट गए हैं।
कब थमेगी बदहाली : बता दें कि यह कोई पहला मामला नहीं है जब इंदौर के सरकारी अस्पतालों में इस तरह की लापरवाही सामने आई हो। पिछले साल फरवरी 2024 में भी एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को मेडिकल के लिए दो दिन तक भटकना पड़ा था। पीसी सेठी अस्पताल से यह कहकर एमटीएच अस्पताल भेज दिया गया था कि सोनोग्राफी के लिए डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। घंटों इंतजार के बाद भी समाधान नहीं निकला और अंततः मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
क्यों नहीं पूरी नहीं हो रही स्टाफ की कमी : बता दें कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की कमी की वजह से आए दिन मरीजों को परेशान होना पडता है। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर भी स्टाफ की कमी का तर्क देकर बरी हो जाते हैं। ऐसे में दूर इलाकों से आने वाले मरीजों को परेशान होना पड रहा है। कई बार इलाज के अभाव में मरीज की मौत हो जाती है। गर्भवती महिलाओं और हादसों में घायल लोगों के साथ अक्सर इस तरह की बदइंतजामी सामने आती है।
रिपोर्ट : नवीन रांगियाल