1. लाइफ स्‍टाइल
  2. »
  3. साहित्य
  4. »
  5. काव्य-संसार
  6. सूना है घर, तुम्हारे बिन
Written By WD

सूना है घर, तुम्हारे बिन

-ललित भारद्वाज

हिन्दी कविता
FILE
मैंने बनाया है
तुम्हारे‍ लिए
तुम्हारे मन की सुकोमल सी भावनाओं के अनुरूप
एक सुंदर सा छोटा घर।
मैंने इस घर को बनाने में
सीमेंट, मिट्टी, ईंट व सरियों की जगह
हाढ़-मांस, दिल-दिमाग तथा
रक्त कोशिकाओं का सम्मिश्रण किया है।
मुझ द्वारा बनाया हुआ
यह तुम्हारा घर
इतना मजबूत घर है
कि जब तक मेरी अंतिम सांस मेरे साथ है
तब तक तुम्हारे लिए बना हुआ
यह तुम्हारा घर
कभी भी टूट नहीं सकता।
यद्यपि
यह घर मैंने तुम्हारे लिए बना तो लिया
लेकिन जब तक तुम इस घर में नहीं आ जाती
तब तक
मुझ द्वारा बनाया हुआ
तुम्हारे लिए
तुम्हारा यह घर
सूना सा ही पड़ा रहता है,
कभी-कभी मकडि़यां इसमें जाले बना लेती हैं,
कभी-कभी धूलभरी तेज आंधियां
अपनी धूल से इसे गंदा कर देती हैं,
कभी-कभी तो कुछ चलते-फिरते उड़ते परिंदे भी
इस घर में घुसकर
तिनकों से अपना
घरौंदा बना लेने का प्रयास कर बैठते हैं।
कैसे करूं मैं तुम्हारे घर की देखरेख,
मुझे और भी तो कई काम रहते हैं।
बार-बार
मुझे तुम्हारे घर की
साफ-सफाई करनी पड़ती है।
मुझसे नहीं होती अब बार-बार
तुम्हारे घर की देख-रेख।
चूंकि
तुम्हारे घर की शोभा तो
तुम ही से तो है
तो फिर
अपना स्वयं का घर
संभाल लेने में इतनी देर क्यों?
...जब इस घर का मालिकाना अधिकार भी
तुम्हारे ही नाम से है
तो फिर अपने स्वयं के घर को
संभालने में इतना असमंजस क्यों?
मुझे तुमसे यह शिकवा नहीं
कि तुम स्वयं का घर छोड़कर कहां रहती हो
लेकिन
तुम अपने घर को ढूंढने का प्रयास तो करो
तुम्हें तुम्हारे घर को ढूंढने में
दिक्कत बिल्कुल नहीं आएगी
क्योंकि
मैं तो बस इतना ही जानता हूं
और इस बात को यकीन से कहता भी हूं कि
मुझ द्वारा बनाए हुए
तुम्हारे लिए
तुम्हारे प्यारे से घर की
सौंधी सी खुशबू हमेशा तुम्हें अहसास कराती रहेगी
कि
मुझ द्वारा बनाया हुआ
यह घर
तुम्हारा ही है
तुम्हारे घर में न आले हैं
............न दीवट हैं
............न झरोखे हैं
............न ‍िखड़कियां हैं
............न दरवाजे हैं
............और न दहलीजें हैं
तुम्हारा घर तो खुला विशाल आंगन है............
............आ जाओ............आ जाओ
क्योंकि............
आज तक............
अभी तक............
सूना है तुम्हारा घर तुम्हारे बिन।
लेखक के बारे में
WD