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Written By स्मृति आदित्य

सपनों का पीला फूल

काव्य-संसार

काव्यसंसार
ND
उम्र बेल की हर पत्ती को चुनकर
किताबों में रखती गई
हर बार पत्ती पीली पड़ती गई
और हर बार उम्र बेल झरती गई।

हर बार पत्ती का हरापन
मेरे ख्वाबों में मटमैला होता गया
हर बार उस पर खिला
सपनों का पीला फूल
शाख पर ही अकेला रोता रहा।

हर बार नवकोंपलों पर
अंकुरण हुए
तमन्नाओं के,
हर बार बनते गए ठूँठ
मेरी ही वर्जनाओं के।