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Written By WD

मैं धरा तुम हो गगन...

धरा गगन
- प्रियंका पांडे

NDND
सावन की पहली फुहार स
कृपार्थ हो गया तन-मन,
रिमझिमाती जब बूँद बन
बरसे जो तुम गगन...

मैं धरा तुम बिन अबली,
जीती सकुचाती- संभली,
आज क्यों अथाह बन
उमड़ रहा मेरा मन...

NDND
तुम हो आकाश-विशाल,
मैं हूँ अविचल धरा
हम दोनों के प्रेम का
कठिन लगता है मिलन...

तुम्हारे इस स्पर्श से
पुलकित होते भाव नवीनतम
कैसे कहुँ तुमसे क्या मिला?
शब्द पड़ते हैं अब कम..