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मेरी कहानी में तुम
संतोष चौबे इसमें कोई शक नहींकि मैं तुम्हारा सम्मान करता हूँ अक्सर भर आता है दिल मेरातुम्हारे प्रति प्यार सेदब जाता हूँ मैंजाने अनजानेतुम्हारे उपकार सेवैसे तो हमसाथ ही रहते हैंमिलते हैंएक दूसरे सेदिल की कहते हैंऔर लोगों का क्याहम खुद मानते हैंकि हम दोस्त हैंपर एक बात बताओं मेरे दोस्तमेरी रचना में आते हीबदल क्यों जाते हो तुम?दिखते हो क्यों मेरे दुश्मनमेरी कहानी में तुम?