मां की अभिलाषा
- रेखा भाटिया
उड़ जा, उड़ जा,भर सपनों में नई दिशा,खुल जा, खुल जा,नए पंख तू लगा,उड़ जा उस जहान में,जहां मंजिल करे तेरा इंतजार,नए रंग तू सजा,नये जहान में तू जा,अब रोक ना पाए कोई तुझे,जा नई दुनिया तू सजा,जहां तेरा मान हो सम्मान हो,तेरी अपनी एक पहचान हो,उड़ जा, उड़ जा,भर सपनों में नई दिशा,ऊर्जावान हो,शक्तिवान हो,निर्भय और निर्विकार हो,कलि से फूल बनकर,नए रास्तों को चुन,रख नींव एक नए जहान की,जहां सर उठाकर पड़े तेरा हर कदम,उड़ जा, उड़ जा,भर सपनों में नई दिशा,खुल जा. .. खुल जा,नए पंख तू सजा,अब अपमान बहुत है सह लिया,भर ऊर्जा आत्मविश्वास की,मेरी नन्ही परी धर नया अवतार,बनकर दैवी शक्ति रूप,पटक कदमों में सारे असुरों को, सभी को नई राह तू दिखा,यही है इस मां की अभिलाषा,उड़ जा, उड़ जा,भर सपनों में नई दिशा,खुल जा, खुल जा,नई रोशनी तू जलानए पंख तू लगा....