literature | बात मान लो नज़र झुकाकर
विलास पंडित 'मुसाफिर'
ND
काम चला लो हाथ मिलाकर,
आम आदमी हो तो प्यारे
बात मान लो नज़र झुकाकर,
मुफलिस के बच्चे जीतें हैं
सूखी बासी रोटी खाकर
माँ का आँचल सूख गया है
दूध पिलाए कहाँ से लाकर
या रब तूने गलती कर दी
धरती पर इंसान बनाकर।

