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बहुत दिनों बाद...
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अरून्धती अमड़ेकर कुछ लिखने का मन किया हैआज बहुत दिनों बाद।मन किया है, नहीं नहीं....शायद ज़ख्मों का दर्द हरा हैआज बहुत दिनों बाद।ज़ख्मों का दर्द, नहीं नहीं....शायद ख़ुद से बात हुई हैआज बहुत दिनों बाद।ख़ुद से बात? हाँ हुई है, शायद मेरा वक्त हुआ है साथआज बहुत दिनों बाद।न लिख पाने की मजबूरी में तोरोज़ रोता था मेरा मन,खाली पन्नों पर रोईं हैं आँखेंआज बहुत दिनों बाद।मन भी वही है, ज़ख्म भी वही हैंदर्द भी है वही,शायद शब्दों ने साथ दिया हैआज बहुत दिनो बाद।मैं भी वही हूँ, मेरी मजबूरी वही हैऔर हैं खाली पन्ने भी वहीशायद कलम ने साथ दिया हैआज बहुत दिनों बाद.....