बम का व्यास
येहूदा अमीखाई (इजराइली कवि)
तीस सेन्टीमीटर था बम का व्यासऔर इसका प्रभाव पड़ता था सात मीटर तकचार लोग मारे गए, ग्यारह घायल हुएइनके चारों तरफ़ एक और बड़ा घेरा है - दर्द और समय कादो हस्पताल और एक कब्रिस्तान तबाह हुएलेकिन वह जवान औरत जिसे दफ़नाया गया शहर मेंवह रहनेवाली थी सौ किलोमीटर से आगे कहीं कीवह बना देती है घेरे को और बड़ाऔर वह अकेला शख़्स जो समुन्दर पार किसी देश के सुदूर किनारों परउसकी मृत्यु का शोक कर रहा था -समूचे संसार को ले लेता है इस घेरे मेंऔर अनाथ बच्चों के उस रुदन का तो मैंज़िक्र तक नहीं करूँगाजो पहुँचता है ऊपर ईश्वर के सिंहासन तक और उससे भी आगेऔर जो एक घेरा बनाता है बिना अन्त और बिना ईश्वर का.(
अनुवाद : अशोक पांडे)