पता बदल गया है मेरे घर का
महमूद दरवेश की कविता
प्रस्तुति : राजेंद्र शर्मा पता बदल गया है मेरे घर काऔर मेरे खाने का वक्तमेरी तंबाकू की खुराक भीमेरे कपड़ों का रंग, मेरा चेहरा और मेरी धज भी मेरा प्यारा चाँद भी यहाँज्यादा बड़ा है, ज्यादा खूबसूरतमिट्टी की गंध इत्र की खुशबू की तरह हैऔर शक्कर की तरह मिठास से भरी है कुदरतयह वैसा ही है जैसे मैं अपने पुराने घर की छत पर पड़ा हूँऔर एक नया तारा चुभा जा रहा है मेरी आँख में...साभार : प्रगतिशील वसुधा