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Written By WD

पतंग

डॉ. सुधा ओम ढींगरा

पतंग
ND
परदेस के आकाश पर
देसी मांजे से सनी
आकांक्षाओं से सजी
ऊंची उड़ती मेरी पतंग
दो संस्कृतियों के टकराव में
कई बार कटते-कटते बची
शायद देसी मांजे में दम था
जो टकरा कर भी कट नहीं पाई
और उड़ रही है .....
विदेश के ऊंचे-खुले आकाश पर ....
बेझिझक, बेखौफ ....