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तुम रास्तों को नापते हो
शोभना चौरे तुम रास्तों को नापते हो,वो तुम्हारीमंजिल नहीं, तुम उनरास्तों पर चलते चलों वो तुम्हारी फितरत नहीं, तुमरास्तों को तोड़ते होवो तुम्हारीमहफिल नहीं,इस नापने और तोड़नेकी प्रक्रिया मेंतुमने अपनानगर बसा लिया।