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Written By WD

तुम रास्तों को नापते हो

तुम
शोभना चौर
NDND
तुम रास्तों को नापते हो,

वो तुम्हारी

मंजिल नहीं,

तुम उन

रास्तों पर चलते चलों

वो तुम्हारी फितरत नहीं,

तुम

रास्तों को तोड़ते हो

वो तुम्हारी

महफिल नहीं,

इस नापने और तोड़ने

की प्रक्रिया में

तुमने अपना

नगर बसा लिया।
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WD