शुक्रवार, 30 जनवरी 2026
  1. लाइफ स्‍टाइल
  2. »
  3. साहित्य
  4. »
  5. काव्य-संसार
  6. ताना-बाना
Written By WD

ताना-बाना

दीपाली पाटील

दीपाली पाटील
ND
रेशमी स्वप्नों का एक ताना-बाना
बुन रहे थे वो और मैं
बिन कुछ कहे एक-दूजे से।
पूरा होने को था प्रेम का सुंदर परिधान।
वो गुम हो गया जाने कहाँ
रेशम के ताने-बाने की एक डोर
उसके हाथ में थी जो
खुलती चली गई।
दूसरा सिरा थामकर मैं
ढूँढ रही हूँ उसको
कि हम फिर से बुन पाए
प्यार का वो परिधान।
काश मैंने कहा ना होता वो उससे
हम बंध रहे हैं इसमें
हमेशा के लिए ताने-बाने की तरह।