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Written By WD

चांद, तुम कहां रहे सारी रात

- संजय कोटिया

हिन्दी कविता
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कल रात जब
ख्वाब में आया चांद,
अर्से बाद,
मैंने उसे बांहों में
समेटकर उलाहना दिया,
तुम कहां रहे
इतनी रात?

मेरी आंखें सन्नाटे भरें
तकती रही राहें
तुम्हारे लिए,

मुख़्तसर सी हंसी लिए
चांद ने कहा,
टूटे नहीं ख्वाबों से
मरासिम तुम्हारे,
वो रोशन नहीं हो सके

क्योंकि मुझे कैद कर लिया था
किसी मां ने थाली में
बच्चे को बहलाने के लिए...