- लाइफ स्टाइल
» - साहित्य
» - काव्य-संसार
कम लगता है जीवन-अर्पण
-
प्रियंका पांडेयअथाह हो तुम, सागर से विशाल... तुम अविचल, अखंड हो ढाल ;प्रभु-स्वरूप करते हो जीवन खुशहाल... करने को तुम्हारा अभिनंदन बार-बार करता है ये मन तुम्हारे इस अंश कोकम लगता है जीवन-अर्पण;याद आता है मुझको, तुम्हारी छाँव के नीचेकरता क्रंदन मेरा बचपन, बचपन को भरता अपनी बाहों, प्रेम भरा वह आलिंगन, सिमटी जिसमें गुड़िया बन मैं, करती खुद पर अभिमान ;हे तात !तुम्हें जब करती याद, मन में छाता साहस अपार;तुमको जो करना चाहूँ अर्पण, सच ही लगता सारा जीवन कम...