ओ मेरी प्यास
एकांत श्रीवास्तव
इस तपते भूखंड पर उड़ती गर्म रेत के बीचजब मैं झुकूं नल परतब ओ मेरी प्यासमुझे मत करना कमजोरपियूं तो एक चुल्लू कमकि याद रहे दूसरों की प्यासओ मेरी भूखमुझे देना ताकतखाऊं तो एक कौर कमकि याद रहे दूसरों की भूखसोऊं तो एक पहर कमरात-रात भर जागकर खटते कामगारों के लिएओ मेरी नींद।