- लाइफ स्टाइल
» - साहित्य
» - काव्य-संसार
ऐसा नया साल मनाएँ
ज्योति जैन मजदूरों को मिले मेहनत का धनसुखी हो सारे किसान जन अनपढ़ ना कोई रहने पाए कसम आज हम सब मिल खाए ऐसा नया साल आज हम मनाएँ जाति भाव छोड़ सब आओप्रांत भाव भी भूल ही जाओ सब मिलजुल कर रहेंआओ आगे यह देश बढ़ाएँ फैल रहे चोरी और रिश्वत रो रहे ईमानदार हिन्द जन देश पर छा रहे संकट के घन सब मिल आज ये संकट मिटाएँ ऐसा नया साल आज मनाएँ।