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Last Updated : गुरुवार, 9 नवंबर 2023 (18:34 IST)

श्रीमती आशा मुंशी के प्रथम काव्य संग्रह, एक बंधन सूत का, लोकार्पण संपन्न

श्रीमती आशा मुंशी के प्रथम काव्य संग्रह, एक बंधन सूत का, लोकार्पण संपन्न - Ek Bandhan   Sut Ka
इंदौर। श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति के सभागार में आज वामा साहित्य मंच द्वारा अपनी सदस्य श्रीमती आशा मुंशी के प्रथम काव्य संग्रह एक बंधन सूत का लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित किया कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय कवि श्री सत्यनारायण सत्तन ने कहा कि कच्चे सूत के धागे से अटूट बंधन का इतिहास भारत में बहुत प्राचीन है यह धागा चाहे राखी का हो या वट वृक्ष या पीपल की पूजा का या शादी के समय गांठ जोड़ने का इन्हीं भावनाओं से प्रेरित संकलन की बहुत सी रचनाएं हैं। कवि जब हिंसा के विरुद्ध आवाज उठाता है तब वह वाल्मीकि और तुलसी बन जाते हैं।
 
मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने कहा की सूत का बंधन परिवार समाज संस्कार को एक मजबूत बंधन आस्था के साथ प्रदान करता है उन्होंने कवियत्री आशा जी के सृजन एवं संघर्ष की प्रशंसा की। कृति पर समीक्षात्मक चर्चा करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार ज्योति जैन ने कहा कि इन रचनाओं को परिवार समाज संस्कार से प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने एक रचना, हां मुझे प्यार हुआ है 60 के पार हुआ है कविता से प्यार हुआ है, पढ़कर सुनाई इनके अलावा ज्योति जैन ने संकल्प बिटिया तुम चले गए अधूरी जिंदगी देकर के संदर्भ में भी रचनाएं उद्धृत की।
 
आरंभ में दीप प्रज्वलन मां सरस्वती की आराधना पश्चात व मंच की अध्यक्ष इंदु पाराशर ने स्वागत उद्बोधन दिया कवित्री आशा मुंशी ने अपने लेखन संदर्भ में बताया तथा पिता के आशीर्वाद को आधार बताया। तथा घर में मेरे दो कलियां हैं धरा हूं मैं तुम्हें क्या दूं तुम दीपक हो आदि भावपूर्ण  रचनाएं पढ़ी। कार्यक्रम का संचालन प्रीति दुबे ने किया आभार परीक्षित मुंशी ने व्यक्त किया। लेखिका का स्वागत वा मा, मंच हिंदी परिवार इंदौर व अन्य के द्वारा किया गया कार्यक्रम में श्रीमती हंसा मेहता प्रदीप नवीन श्री संतोष मोहंती हरे राम बाजपेई दामिनी सिंह अमरजीत कौर चड्ढा वाणी जोशी डॉ आरती दुबे प्रेम कुमारी नाहटा कलाकार देवेंद्र शर्मा श्रीमती पुष्पा द सोधी माधवी तारे मुकेश तिवारी मुकेश इंदौरी श्री दिनेश तिवारी आदि काफी संख्या में साहित्यकार व, सुधी जन व लेखिका परिवार के सदस्य उपस्थित थे।
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अटाला