जानिए हिन्दी सेवी विदेशी विद्वान


पीटर वरान्निकोव- (रूस)

पीटर वरान्निकोव के बारे में मशहूर है कि भले ही वह रूसी हों,पर कभी किसी जन्म में जरूर हिंदुस्तानी रहे होंगे। भारत उनके दिल में बसता है। उन्हें तुलसीदास की अमर रचना 'रामचरितमानस' ने इतना प्रभावित किया कि उन्होंने इसका रूसी में अनुवाद किया। यह अनुवाद बेहद चर्चित हुआ।


वह 70 के दशक में दिल्ली स्थित सोवियत सूचना केंद से जुड़े थे और हिन्दी लेखकों और दिल्ली के कॉफी हाउस में होने वाली उनकी बैठकों में पाबंदी से आते थे। सोवियत संघ के विघटन तक उन्होंने यहीं रहकर काम किया। रूस लौटने के बाद उन्होंने वहां हिन्दी सिनेमा पर केंदित एक पत्रिका भी निकाली। पीटर बढ़ती उम्र की वजह से अब सक्रिय तो नहीं हैं,लेकिन रूस में हिन्दी जानने वालों के बीच एक प्रेरक शख्सियत जरूर हैं।

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