पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल : क्या कहती है धरती हमारी


 
> मेरी आयु की भांति मेरे जन्म के विषय में भी लोगों की भिन्न-भिन्न धारणाएं रही हैं। सर्वप्रथम प्रस्तुत कल्पना के अनुसार आकाश में अकेले सूर्य के सामने जब कोई विशाल तारा आया, तब उसके आकर्षण से सूर्य से कुछ पदार्थ बाहर निकल आया, जो तारे के चले जाने के पश्चात अकेला रह गया और घूमता रहा। यह घूमता पदार्थ ठंडा होकर टुकड़ों में बिखर गया, जो ग्रह और उपग्रह कहलाए। मैं उन्हीं में से एक हूं। 
 
कुछ लोग मेरा जन्म आकाश में बिखरे छोटे-छोटे अणुओं के आपस में इकट्ठे होकर ठोस टुकड़ों के रूप में बन जाने से बताते हैं। कुछ विद्वान मेरा जन्म आकाश में घूमती चमकदार निहारिकाओं से निकलने वाली पट्टियों के ठोस होकर अलग-अलग टुकड़ों में बंट जाने से बताते हैं।
 
एक अन्य विचार के अनुसार सूर्य जैसे तारे में कभी-‍कभी विखंडन होने से टूटे हुए भागों के ठोस होने से मेरे जैसे ग्रहों की उत्पत्ति मानते हैं। कुछ लोगों ने मेरे जन्म में चुम्बकीय परिकल्पना मानी है। उनके अनुसार आकाश में बादलों के रूप में अनेक परमाणु छाए हुए थे, जब सूर्य उसमें से होकर निकला तब उसके चुम्बकीय प्रभाव से ये अणु एकत्रित और संगठित होकर अलग-अलग मेरे जैसे ग्रह बन गए। 
 
मेरे जन्म के विषय में अंतिम परिकल्पना ब्रह्माण्ड का विकासवादी अथवा महाविस्फोट सिद्धांत है। इसके अनुसार बताया गया है कि अब से करोड़ों वर्ष पूर्व अंतरिक्ष में एक विशाल पदार्थ था। 
 
उसमें एक भयंकर विस्फोट हुआ जिससे यह टूटकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखर गया। बाद में ये कण गुरुत्वाकर्षण से आपस में अलग-अलग समूह में इकट्ठे होकर मेरे जैसे पिंड, ग्रहों के रूप में बन गए। 
 
वर्तमान में इस परिकल्पना में कुछ संशोधन कर इसे 'बिग बैंग' का नाम दिया गया है। पर इतने पर भी अभी लोग संतुष्ट नहीं हो पाए हैं और लगातार नई-नई खोजों और परिकल्पनाओं में लगे हुए हैं।
 
 


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