गुरुवार, 5 मार्च 2026
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Written By WD

मैया मत देना इनको खाना

- शशींद्र जलधारी

कविता विनोद वार्ता नगाड़ा
ND

ओ भैया... ओ बहना... तुम
वोट डालने अवश्य जाना,
ये आलस कर जाएँ मैया
मत देना इनको खाना।

यह मत सोचना तुम्हारे सिर्फ
एक वोट की क्या है कीमत,
वोटों के ताकत से ही
बदलेगी इस प्रदेश कि किस्मत।

सरकार बनाने में है समझो
हर एक वोट की अहमियत,
एक-एक ईंट जुड़कर ही
तो खड़ी होती है इमारत।

स्वतंत्र रूप से निर्णय लेकर
करना तुम मतदान,
तुमको साबित करना है
सजग नागरिक की पहचान।

चुनाव जीतते ही ये आखिर
क्यों भूल जाते अपना इलाका,
चुनाव आते ही, क्षेत्र छोड़कर
नाम नहीं लेते जाने का।

ये कैसा है इनका व्यवहार
जो भूल जाते हैं उपकार,
पहले खुद आते वोटर के पास
फिर सुनते नहीं उनकी पुकार।

मतदाता के पैरों को छूने
मैं नहीं होती हिचक,
फिर मालिक के पास जाने से
क्यों कतराता है सेवक।

क्षणिक फायदा देख तुम
अपना वोट गँवाना मत,
खुद ही अपने लिए कभी
तुम बुलाना मत आफत।