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Written By ND

देव उठे, ब्याह शुरू !

देव उठे
- देवेंद्र शर्मा

Devendra SharmaND
गुलशन कुँवारेपन का छूटा
जिम्मेदारी की राह शुरू !
लो, देव उठे, अब ब्याह शुरू !!

1. घोड़ी 'ठहरी', बाजा 'ठहरा'
मैरिज गार्डन भी फिक्स हुए।
मंगलगीतों की जगह, अहा --
इनवाइट फिल्मी रीमिक्स हुए।

कैटरर, टेंट भी 'ठहर' चुके,
तय हो गए टेस्टी व्यंजन भी।
जब सारी चीज़ें 'ठहर' चुकीं
तब तय हुए दुल्हा, दुल्हन भी।

लड़केवाले की भूख शुरू,
लड़कीवाले की आह शुरू !
लो, देव उठे, अब ब्याह शुरू !!

2. तैयारी सभी, बेकरार सभी,
अब प्रीतिभोज में जाएँगे।
नई ड्रेस में सजके चहकेंगे,
नई डिश का लुफ्त उठाएँगे।

डीजे पर जमकर थिरकेंगे,
नैनों के बाण चलाएँगे।
बेगानी शादी में भइया,
जोड़ी अपनी भी जमाएँगे।

अरमान दिलों में फुदकेंगे,
मनमीत की होगी चाह शुरू !
लो, देव उठे, अब ब्याह शुरू !!

3. सड़कों पे बारातें नाचेंगी,
चलता ट्रैफिक थम जाएगा।
ट्रैफिक का सिपाही फर्ज भूल,
बारात के संग रम जाएगा।

मंजिल पर दुल्हों को पहुँचा,
घोडि़यों घरों को जाएँगी।
दूल्हों का दिल गार्डन होगा,
दुल्हनें भी सपने सजाएँगी।

एक सुंदर जहाँ बसाने का
बेतुका-सा एक उत्साह शुरू !
लो, देव उठे, अब ब्याह शुरू !!
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ND