वेबू : क्या भाई काका, बारिश का मौसम बिना बरसात के निकला जा रहा है और आप हैं कि बेखबर होकर बस अखबार पढ़ रहे हैं। इधर किसानों ने बोवनी भी कर दी है मगर लगता है कि बारिश के अभाव में उनका बीज उसी तरह सूखा रह जाएगा जिस तरह शासकीय धन वर्षा की राह देखते-देखते गरीब भूखा रह जाता है।
काका : भई मुझे सब मालूम है। मेरे मन में भी बारिश के अभाव का ही विचार घोटाला कर रहा है। यह देखो मैं पढ़ रहा था कि रूठे इंद्रदेव को मनाने के लिए प्रदेश में कैसे-कैसे टोटके किए जा रहे हैं।
वेबू : काका क्या वाकई टोटकों में वर्षा करवाने की ताकत है। मेरी समझ में नहीं आता कि सिर पर टोकरी में मेंढक रखकर उनकी यात्रा निकालने से इंद्रदेव को भला क्यों प्रसन्नता होगी?
काका : वेबू अगर आदमी को एक करवट नींद नहीं आए तो वह दूसरी करवट बदलता है न। परंपरा व नियम यह कि पहले बारिश हो फिर मेंढक मैदान में आएँ। अब बारिश न हुई तो इसका उल्टा करके देखने में क्या हर्ज है।
वेबू : काका अलग-अलग मंदिरों में अलग-अलग देवी-देवताओं की पूजा अर्चना क्यों?
काका : वेबू जिस तरह देश में लाल बत्ती वाले हजारों आका हैं, उसी तरह देवी-देवता भी हैं। अब क्या पता वर्षा की फाइल किस देवता के दरबार में अटकी पड़ी है अतः उसे आगे बढ़ाने के लिए सभी को भेंट-पूजा अर्पित की जा रही है।
वेबू : काका एक जगह तो मैंने सुना है कि इंद्रदेव को मनाने के लिए कवि सम्मेलन भी आयोजित किया गया है।
काका : अक्लवीरों के बीच अनेक बुद्धिहीन भी होते हैं। अब कविताएँ सुनकर इंद्रदेव व बादल आते-आते भाग गए तो इन्हें कोई क्या कहेगा।
वेबू : काका प्रधानमंत्रीजी को भी सलाह दी जा रही है कि वे पुरातन राजाओं की तरह खेत में हल चलाएँ।
काका : वेबू प्रधानमंत्रीजी ऐसा नही करेंगे पहले ही वे इतने कामों में व्यस्त हैं। कहीं हल अटक गया तो हल निकालना बहुत भारी पड़ेगा। उन्हें पहले ही कई वर्षों पुराने अटके हल निकालना है।
वेबू : फिर काका क्या आपकी झोली में भी कोई प्रभावशाली टोटके हैं?
काका : वेबू समय के अनुसार टोटके भी बदलना चाहिए। जैसे कि एक दिन सभी दूधवाले बिना पानी के शुद्ध दूध जनता को वितरित करें।
वेबू : और बचे पानी को खेतों में डालें। वाह, यह तो जनहितकारी भी है।
काका : और सुनो! एक विवाह सप्ताह मनाया जाए, जिसमें दहेज में दस प्रतिशत छूट मिले। नगर में चुनाव में पर्चा दाखिल करने वाले अपराधी पृष्ठभूमि के व्यक्तियों की पूजा (?) की जाए। 'बरसात' फिल्म की मुफ्त सीडी गरीबों को दान में दी जाए। मेंढकों की बजाए कार्यालयों में कभी न मिलने वाले अधिकारियों की शोभायात्रा निकाली जाए।
वेबू : काका एक गाँव में तो महिलाओं ने नग्न अवस्था में खेतों में हल चलाए। शुक्र है उस समय सभी पुरुष घरों में कैद थे।
काका : उससे कुछ नहीं होना जाना। यदि इस टोटके में दम होता तो शहरी बालाओं के पहनावे के कारण नगरों में अब तक बाढ़ आ गई होती।
वेबू : वाह काका वाह! आपसे प्रेरणा पाकर एक टोटका मुझे भी सूझा है। एक दिन सभी नगरवासी प्राकृतिक कर्म से निवृत्त होने के लिए पानी के लोटे लेकर (जो फ्लश में व्यर्थ हो जाता है) जंगल, खेतों में जाएँ तो पौधों को बिना बरसात के भरपूर पानी मिल जाएगा।