पहले जिन्होंने था कि देश का बेड़ा गर्क । घूम-घूमकर कर रहे अब वो जनसंपर्क ।।
जनता से हैं कर रहे मीठे-मीठे वादे। कुर्सी पाने पर होंगे इनके अलग इरादे।।
पार्टी चाहे जो जीते सबका एक ही काम। जनता का धन लूट लो भली करेंगे राम।।
हाथ जोड़कर झुके हुए, माँग रहे हैं वोट।
अंतर में है छुपा हुआ, नेता वाला खोट।।
अम्माँ, दादा, भैनजी, काका, भैया, नाना।
द्वार पे सेवक आया है, उसे जरूर जिताना।।
चेहरे पर है शहद से, भी मीठी मुस्कान। हँसने को जो फैले होंठ, छू-छू लेते कान ।।
हाथ जोड़कर झुके हुए, माँग रहे हैं वोट। अंतर में है छुपा हुआ, नेता वाला खोट।।
अम्माँ, दादा, भैनजी, काका, भैया, नाना। द्वार पे सेवक आया है, उसे जरूर जिताना।।
खूब चकाचक कर दूँगा, तुम लोगों का गाँव। एक बार बस जिता दो, पडूँ तुम्हारे पाँव।।
जनता सबको जानती, मगर बनी असहाय। नेता दुहता कपट से, और चुपचाप है गाय।।