गुरुवार, 12 मार्च 2026
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Written By ND

चुनाव चक्रम्

चुनाव चक्रम्
- देवेंद्र
Devendra SharmaIFM

पहले जिन्होंने था कि
देश का बेड़ा गर्क ।
घूम-घूमकर कर रहे
अब वो जनसंपर्क ।।

जनता से हैं कर रहे
मीठे-मीठे वादे।
कुर्सी पाने पर होंगे
इनके अलग इरादे।।

पार्टी चाहे जो जीते
सबका एक ही काम।
जनता का धन लूट लो
भली करेंगे राम।।
हाथ जोड़कर झुके हुए, माँग रहे हैं वोट। अंतर में है छुपा हुआ, नेता वाला खोट।। अम्माँ, दादा, भैनजी, काका, भैया, नाना। द्वार पे सेवक आया है, उसे जरूर जिताना।।


चेहरे पर है शहद से, भी मीठी मुस्कान।
हँसने को जो फैले होंठ, छू-छू लेते कान ।।

हाथ जोड़कर झुके हुए, माँग रहे हैं वोट।
अंतर में है छुपा हुआ, नेता वाला खोट।।

अम्माँ, दादा, भैनजी, काका, भैया, नाना।
द्वार पे सेवक आया है, उसे जरूर जिताना।।

खूब चकाचक कर दूँगा, तुम लोगों का गाँव।
एक बार बस जिता दो, पडूँ तुम्हारे पाँव।।

जनता सबको जानती, मगर बनी असहाय।
नेता दुहता कपट से, और चुपचाप है गाय।।