पूरा देश चिंतित था कि भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली को उनका खोया हुआ फार्म नहीं मिल रहा है। हमने विचार किया कि इस राष्ट्रीय चिंता में सहभागी बनना चाहिए। अतः अपनी एक शाम इस राष्ट्रीय चिंता के नाम कर हम अपनी मित्रमंडली के साथ चिंतित होने बैठ गए।
चिंता-चिंतन को जन्म देती है अतः यह चिंतन आरंभ हो गया कि आखिर यह खोया हुआ फार्म क्या है, कौन-सा है और कैसे वापस मिल सकता है। सबसे कीमती प्रकार का फार्म देश के नामी-गिरामी नेताओं, अधिकारियों, उद्योगपतियों और अन्य धनाढ्य लोगों के पास होते हैं जिन पर वे बड़े-बड़े हाऊस बना लेते हैं।
हमारे क्रिकेट कप्तान भी कोई छोटी-मोटी हस्ती नहीं है उनका फार्म भी इसी टाइप का होगा। मगर भला कोई फार्म कैसे खो सकता है। फार्म बारिश के अभाव में बंजर हो सकता है, अतिवृष्टि से तालाब बन सकता है, दिवाला निकल जाने पर हाथ से निकल सकता है, प्रश्रय प्राप्त गुण्डों द्वारा हथियाया जा सकता है मगर खो नहीं सकता है। फार्म अचल संपत्ति है वह अपनी जगह पर ही रहता है।
हाँ उसका मालिक चाहे तो उससे चाहे जितनी दूर जा सकता है। वीआईपी लोगों को पता नहीं होता कि उनके कहाँ-कहाँ और कितने फार्म हैं। गांगुली इतने बड़े क्रिकेटर हैं और क्रिकेट की कमाई सभी को मालूम है। अवश्य ही उनके पास कई फार्म होना चाहिए। अब कहाँ तक वे अपने फार्मों का हिसाब रखेंगे। एक आध यदि इधर-उधर हो भी गया तो मीडिया को नाहक उनके व्यक्तिगत मामले में दखल देने की क्या जरूरत है।
साथ में बैठकर चिंता में हिस्सा ले रहे हमारे राजनैतिक मामलों के विशेषज्ञ मित्र बोले कि 'मुझे लगता है गांगुलीजी का मन राजनीति प्रवेश करने का हो आया है। वैसे भी शून्य पर आउट होने वालों के राजनीति में उज्ज्वल अवसर होते हैं।
लगता है कि यह फार्म अवश्य किसी चुनाव क्षेत्र की उम्मीदवारी का फार्म हो सकता है। अनुभवहीनता के कारण गांगुलीजी अवश्य बिना ढोल-ढमाके व सौ पचास साथी क्रिकेटरों को लिए बिना फार्म भरने चले गए होंगे और वह गुम हो गया होगा। यह भी हो सकता है कि गांगुलीजी की गैर आपराधिक पृष्ठभूमि के कारण रिजेक्ट कर दिया गया हो और उन्हें उसके खो जाने का बहाना घड़ना पड़ा हो।'
हमारे एक सरकारी कामकाज से सुपरिचित मित्र बोले कि 'भैया हो सकता है कि हमारे कप्तान इनकम टेक्स जैसे किसी सरकारी कामकाज के फेरे में आ गए हों। जरूर कोई अति आवश्यक सरकारी फार्म होगा जो गुम हो गया होगा। अब गांगुली जैसे बड़े आदमी, जिन्होंने सरकारी दफ्तर का रुख कभी न किया हो, को कौन बताए कि सरकारी कर्मचारी जब नया फार्म देने से मना कर देते हैं तो वह विभाग के बाहर पेड़ के नीचे बैठे एजेन्ट के पास पैसे फेंकने पर मिल जाता है।'
मेरी पुत्री भी इस वार्तालाप में कूद पड़ी। उसने बताया कि शायद यह एडमीशन फार्म हो जो कप्तान ने फिर से क्रिकेट स्कूल में दाखिला लेने के लिए लिया हो। अब तक की चिंता के भार से पस्त दिमाग को स्फूर्ति देने के लिए हम श्रीमतीजी को चाय-पकोड़ों का आर्डर देने के लिए आवाज देने ही वाले थे कि उन्होंने आकर वेबदुनिया की गर्मागर्म ताजा खबर परोस दी कि आईसीसी ने कप्तान गांगुली की धीमी गति के ओवरों के कारण अगले छः मैचों के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। अतः खोये हुए फार्म की चिंता करना फिलहाल गैर जरूरी है।