मोदी से मिलने को बेताब मोहम्मद यूनुस क्यों पहुंचे चीन, भारत ने क्यों लिखी चिट्ठी, आखिर क्या है दोनों देशों का प्लान?
क्या बांग्लादेश में फिर से हो सकता है तख्तापलट, क्या होगा शेख हसीना का?
बांग्लादेश के पीएम मोहम्मद यूनुस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने को बेताब हैं। मोहम्मद यूनुस अगले सप्ताह बैंकॉक में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के लिए जा रहे हैं। वहां पीएम मोदी भी रहेंगे। मोहम्मद यूनुस पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय मुलाकात करना चाहते हैं। लेकिन इसी बीच मोहम्मद यूनुस चीन पहुंच गए। वे वहां 28 मार्च को चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ बातचीत करेंगे। इस दौरान दोनों देश कुछ समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक यह दौरा भारत के परिपेक्ष से तो बिलकुल सही नहीं है।
दूसरी तरफ भारत ने मोदी ने उनकी मुलाकात को लेकर अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। हालांकि इस बीच पीएम मोदी ने मोहम्मद यूनुस को खत लिखा है, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम में भारत की अहम भूमिका का जिक्र करते हुए यह भी कहा है कि भारत और बांग्लादेश के बलिदान का साझा इतिहास रहा है।
भारत-बांग्लादेश का क्या प्लान है : भारत, बांग्लादेश और चीन की गतिविधियों पर अब पूरी दुनिया की नजर है। सवाल उठता है कि इस पूरी कवायद के बीच आखिर भारत और बांग्लादेश का क्या प्लान है। दोनों देशों में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद रिश्तों में कुछ खटास चल रही है, ऐसे में चीन से मिलकर यूनुस भारत का क्या संदेश देना चाहते हैं और पीएम मोदी की बांग्लादेश को लिखी गई चिठ्ठी के क्या मायने हो सकते हैं?
मोदी से मिलने को क्यों बेताब यूनुस : एक तरफ चीन दौरे पर गए मोहम्मद यूनुस दूसरी तरफ भारत के पीएम नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए भी बेताब हैं। बांग्लादेश ने मंगलवार को कहा कि वह अगले सप्ताह बैंकॉक में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच बैठक के अपने प्रस्ताव पर भारत की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। बांग्लादेश के विदेश सचिव मोहम्मद जशीमउद्दीन ने मुख्य सलाहकार यूनुस की चीन और थाईलैंड की आगामी यात्राओं की रूपरेखा बताते हुए कहा— हमारी ओर से हम बैठक के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अब हम भारत से सकारात्मक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
क्या है पीएम मोदी के खत के मायने : पीएम मोदी ने बांग्लादेश को मोहम्मद यूनुस के नाम जो खत लिखा उसके भी मायने टटोले जा रहे हैं। मोदी ने खत में लिखा— बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम की भावना हमारे संबंधों के लिए मार्गदर्शक बनी हुई है, जो कई क्षेत्रों में फली-फूली है और हमारे लोगों को ठोस लाभ पहुंचा रही है। हम शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए हमारी आम आकांक्षाओं से प्रेरित और एक-दूसरे के हितों और चिंताओं के प्रति पारस्परिक संवेदनशीलता पर आधारित इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री ने 1971 के मुक्ति संग्राम का जिक्र करते हुए बांग्लादेश को नए राष्ट्र के निर्माण में भारत की भूमिका के बारे में याद दिलाया। यह भी कहा है कि भारत और बांग्लादेश के बलिदान का साझा इतिहास रहा है। बांग्लादेश के मुखिया यूनुस को पीएम मोदी ने यह खत ऐसे वक्त में लिखा है, जब दोनों की बिम्सटेक समिट में मुलाका की संभावना जताई जा रही है।
हसीना के बाद बदला बांग्लादेश : बता दें कि मुक्ति संग्राम जंग में भारत की भूमिका को लेकर बांग्लादेश हमेशा से सम्मान करता रहा है, लेकिन शेख हसीना की सत्ता जाने के बाद बांग्लादेश भारत का मुखर विरोधी हो गया है। 5 अगस्त, 2024 को बांग्लादेश में शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के तख्तापलट के बाद नई दिल्ली और ढाका के बीच संबंध तनाव में आ गए थे, यह घटना छात्रों के सरकारी नौकरियों में भर्ती में आरक्षण समाप्त करने की मांग को लेकर किए गए आंदोलन पर की गई कार्रवाई के खिलाफ व्यापक विरोध के मद्देनजर हुई थी। प्रधानमंत्री ने 1971 के मुक्ति संग्राम का जिक्र करते हुए बांग्लादेश को नए राष्ट्र के निर्माण में भारत की भूमिका के बारे में याद दिलाया। यह कदम बांग्लादेश में दमनकारी पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लड़ाई और भारत के खिलाफ अभियान में बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की भूमिका के इतिहास को मिटाने के प्रयासों के बीच उठाया गया है।
क्या फिर से होगा बांग्लादेश का तख्तापलट : दो हफ्ते पहले ही बांग्लादेश में आवामी लीग पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया था कि शेख हसीना जल्द ही प्रधानमंत्री के तौर पर देश लौटेंगी। आवामी लीग के नेता रब्बी आलम ने कहा था कि युवा पीढ़ी ने गलती की है, लेकिन उन्हें बहकाया गया। आलम के इस बयान के बाद से ही छात्र संगठनों ने प्रदर्शन शुरू किए। खासकर जातीय नागरिक पार्टी (जिसे नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) के तौर पर भी जाना जाता है) के नेताओं ने इस मामले में सेना को घेर लिया और आरोप लगाया कि बांग्लादेश की सेना ही अपदस्थ प्रधानमंत्री की पार्टी आवामी लीग को फिर स्थापित करने की साजिश रच रही है। पार्टी के नेता हसनत अब्दुल्ला ने कहा कि सेना की यह कोशिश सैन्य समर्थित साजिश है और इसे किसी भी कीमत पर विफल किया जाएगा।
राष्ट्रपति मुर्मू ने भी भेजी चिट्ठी : वहीं, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी अपने समकक्ष मोहम्मद शहाबुद्दीन को पत्र लिखकर लोकतांत्रिक, स्थिर, समावेशी, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील बांग्लादेश के लिए समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने कहा— भारत-बांग्लादेश संबंध बहुआयामी हैं और हमारा सहयोग व्यापार, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, विकास साझेदारी, बिजली और ऊर्जा, शिक्षा, क्षमता निर्माण, सांस्कृतिक सहयोग और लोगों के बीच आदान-प्रदान जैसे विविध क्षेत्रों में फैला हुआ है। बांग्लादेश भारत की पड़ोसी पहले और एक्ट ईस्ट नीतियों, इसके सागर सिद्धांत और इंडो-पैसिफिक विजन के केंद्र में है।
रिपोर्ट : नवीन रांगियाल