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Written By WD Feature Desk
Last Updated : शुक्रवार, 29 नवंबर 2024 (11:05 IST)

जेआरडी टाटा की पुण्यतिथि, जानें 7 अनसुनी बातें

photo by Tata Titans
Highlights
  • भारत रत्न जे.आर.डी टाटा जी की पुण्यतिथि।
  • भारत के औद्योगिक विकास के प्रणेता थे जेआरडी टाटा। 
  • जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा जी की पुण्यतिथि आज। 

JRD Tata : आज जेआरडी टाटा की पुण्यतिथि मनाई जा रही है। उनका निधन 29 नवंबर को हुआ था। उनका पूरा नाम जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा था। वे एक भारतीय व्यवसायी होने के साथ-साथ विमानन अग्रणी भी थे। 
 
जेआरडी टाटा का जन्म पेरिस में 29 जुलाई 1904 में हुआ था। वे रतनजी दादाभाई टाटा और सूनी के सबसे बड़े बेटे थे तथा टाटा स्टील के संस्थापक जेएन टाटा के भतीजे थे। 
 
भारत की पहली एयरलाइन बनाने का श्रेय जेआरडी टाटा को ही जाता है। वे भारत के सबसे बड़े औद्योगिक तथा भारतीय विमानन के जनक/ पिता के रूप में जाने जाते हैं। विज्ञान, स्वास्थ्य और उड़ान के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले जेआरडी टाटा ने अपने पिता के निधन के बाद मात्र 22 वर्ष की उम्र में टाटा संस के डायरेक्टर और चेयरमैन के रूप में कार्य किया। और देश के सबसे बडे औद्योगिक घराने को नई बुलंदियों तक पहुंचाया था।
 
उन्होंने ही भारत में नागरिक उड्डयन की शुरुआत की थी और देश के सामाजिक तथा आर्थिक विकास में उल्लेखनीय योगदान जेआरडी ने ही दिया था। जेआरडी टाटा की याद तथा उनके कार्य की स्मृति में भारत सरकार द्वारा वर्ष 2009 में उनका स्मारक टिकट जारी किया।
 
वे भारत के पहले व्यक्ति थे, जिनके पास उड़ान लाइसेंस था तथा उन्होंने सन् 1948 में भारत की पहली अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन के रूप 'एयर इंडिया इंटरनेशनल' की शुरुआत की थी तथा भारत सरकार द्वारा सन् 1953 में उन्हें एयर इंडिया का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। और इंडियन एयरलाइंस के बोर्ड में निदेशक के रूप में भी उन्होंने कार्य किया था।
 
उन्होंने जब अपने ग्रुप की कंपनियों का कामकाज संभाला तो टाटा ग्रुप में केवल 14 कंपनियां थीं, जिसे उन्होंने अपनी मेहनत और लगन के बल पर कुछ ही सालों में 90 कंपनियों तक पहुंचा दिया था। उन्हें भारत के उड्डयन क्षेत्र के संस्थापक के रूप में भी जाना जाता है। 
 
गुर्दा की संक्रमण के कारण जेआरडी टाटा की निधन 29 नवंबर 1993 को जिनेवा, स्विट्जरलैंड में हुआ था, उस समय उनकी आयु 89 वर्ष की थी। वे भारत रत्न पाने वाले देश के पहले उद्योगपति थे।

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