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Written By ND

दिग्गज चौकड़ी का सपना पूरा होगा?

भारत क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया अमय खुरासिया
- अमय खुरासिया
भारतीय क्रिकेट टीम का आगामी दौरा कुछ मायनों में महत्वपूर्ण है। यह हमारे पाँचों सीनियर खिलाड़ियों सचिन तेंडुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण और अनिल कुंबले का आखिरी ऑस्ट्रेलियाई दौरा होगा। ऑस्ट्रेलिया अभी विश्व कीर्तिमान से केवल 3 जीत दूर है।

टेस्ट क्रिकेट में लगातार सर्वाधिक विजय का कीर्तिमान (16 टेस्ट) ऑस्ट्रेलिया के ही नाम है जो उसने स्टीव वॉ की कप्तानी में बनाया था। तीसरा महत्वपूर्ण पहलू यह रहेगा कि क्या ग्लेन मैग्राथ और शेन वॉर्न (जिन्होंने अपनी गेंदबाजी से भारत को हमेशा परेशानी में डाला है) के बिना ऑस्ट्रेलिया वह दबाव बना पाएगी।

पिछले कुछ समय में हमने टेस्ट क्रिकेट में कीर्तिमान रचे हैं, जिसके फलस्वरूप हमारी टीम आत्मविश्वास से लबरेज है। हम 21 वर्ष बाद इंग्लैंड से इंग्लैंड में श्रृंखला जीते हैं, वेस्टइंडीज को वेस्टइंडीज में 35 वर्ष बाद हराया है और हाल ही में पाकिस्तान से घरेलू श्रृंखला 1979-80 के बाद अब जीते हैं।

ऑस्ट्रेलिया से खेलना हमेशा चुनौतीभरा रहा है और वह भी जब उनके आँगन में खेलना हो। मेरे लिहाज से उनकी गेंदबाजी थोड़ी प्रभावित जरूर हुई है क्योंकि विश्व के दो महान गेंदबाज (मैग्राव वॉर्न) जो उनकी गेंदबाजी की रीढ़ थे इसी वर्ष रिटायर हुए हैं।

हाल में ही जिस तरह उन्होंने श्रीलंका को हराया है उससे साफ जाहिर है कि उनके ढाँचे में खिलाड़ियों की खेप हमेशा तैयार रहती है, भले ही वह शॉन टैट, मिशेल जॉनसन या स्टुअर्ट क्लार्क हो।

विचार करने योग्य यह भी है कि क्या हमारी गेंदबाजी में वह पैनापन है कि हम किसी श्रेष्ठ टीम को दो बार आउट कर पाएँगे। क्या वर्तमान भारतीय गेंदबाज 20 विकेट चटका पाएँगे। मुझे तो यह डगर आसान नहीं लगती।

यदि पर्थ की उछाल वाली पिच छोड़ दें तो मेलबोर्न और सिडनी की पिच बहुत कुछ उपमहाद्वीप जैसी ही है। हमारे अनुभवी बल्लेबाज इन अनुकूल परिस्थितियों में जरूर सुर में दिखेंगे। बल्लेबाजी हमारी टीम का सबसे मजबूत पक्ष है व हमारे चारों दिग्गज इस श्रृंखला को जरूर जीतना चाहेंगे। उनके खेल काल में बस इसी उपलब्धि का दराज रिक्त है।

कुछ कामयाबियाँ खेल जीवन के संपूर्ण तमगों का रस होती हैं और उस अनुभूति को अभिव्यक्त वह प्यासा खिलाड़ी ही कर सकता है, जिसने उसे पाने के लिए वह यात्रा की हो।

मन के एकांत में कुछ दबी हुई प्रबल आकांक्षाओं को पाना ही पूर्णता का अहसास कराता है और यह केवल अति भाग्यशाली खिलाड़ियों को ही नसीब होता है वरना अपूर्ण और अक्षम होने का अहसास आखिरी साँस तक पीछा नहीं छोड़ता है। यही ख्याल इन दिग्गजों के मन में भी होगा।
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