सम्बंधित जानकारी
- भारत: ऐप और ऑक्सीजन के साथ युवा लड़ रहे हैं महामारी से
- Covid 19: कर्नाटक के कुछ हिस्सों में ऑक्सीजन संकट गहराया, सरकार का इंकार
- क्या रेमडेसिविर खरीदकर बांट रहे हैं नेता? दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए जांच के आदेश
- केरल में 'मेडिकेब' नामक पोर्टेबल अस्पताल लॉन्च, कोरोना का बोझ होगा कम
- Fact Check: क्या Vanadium 30 से बढ़ता है ऑक्सीजन लेवल? जानिए Experts से
अवमानना कार्यवाही क्यों न शुरू करें...ऑक्सीजन संकट पर केंद्र से बोला हाईकोर्ट- आप शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर छिपा सकते हैं, हम नहीं
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र से कारण बताने को कहा कि कोविड-19 मरीजों के उपचार के लिए दिल्ली को ऑक्सीजन की आपूर्ति पर आदेश की तामील नहीं कर पाने के लिए उसके खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जाए।
अदालत ने कहा कि आप शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर छिपा सकते हैं, हम ऐसा नहीं करेंगे। क्या आपको इन चीजों के बारे में पता नहीं है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने केंद्र की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि मौजदा चिकित्सकीय ढांचे के आलोक में दिल्ली 700 मीट्रिक टन चिकित्सकीय ऑक्सीजन की हकदार नहीं है।
पीठ ने कहा कि हम हर दिन इस खौफनाक हकीकत को देख रहे हैं कि लोगों को अस्पतालों में ऑक्सीजन या आईसीयू बेड नहीं मिल रहे, कम गैस आपूर्ति के कारण बेड की संख्या घटा दी गई है।
अदालत ने केंद्र सरकार के 2 वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस पर जवाब देने के लिए बुधवार को अदालत के समक्ष हाजिर होने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का 30 अप्रैल का विस्तृत आदेश दिखाता है कि उसने केंद्र को 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मुहैया कराने का निर्देश दिया था न कि महज 490 मीट्रिक टन।
पीठ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय पहले ही आदेश दे चुका है, अब उच्च न्यायालय भी कह रहा है कि जैसे भी हो केंद्र को हर दिन दिल्ली को 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति करनी होगी। (भाषा)
