Data Story : अप्रैल में कोरोना का कोहराम : मात्र 30 दिन में 66 लाख मामले, 45000 से ज्यादा की मौत

नृपेंद्र गुप्ता| Last Updated: शुक्रवार, 30 अप्रैल 2021 (14:32 IST)
नई दिल्ली। (Coronavirus) के संक्रमण के चलते देश में हालात बुरी तरह बिगड़ रहे हैं। एक तरफ जहां संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है वहीं मौत का आंकड़ा भी चिंता बढ़ा रहा है। देश में पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के अब तक के सर्वाधिक 3,86,452 नए मामले सामने आए जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1,87,62,976 हो गई। इसके साथ ही एक्टिव मरीजों की संख्या 31 लाख को पार कर गई।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा शुक्रवार सुबह आठ बजे अपडेट किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 3,498 और मरीजों की मौत हो जाने से संक्रमण के कारण अब तक दम तोड़ चुके लोगों की कुल संख्या बढ़कर 2,08,330 हो गई। आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब तक 1,53,84,418 लोग ठीक हो चुके हैं।
अप्रैल में फूटा कोराना बम : 1 अप्रैल को देश में 72,330 कोरोना संक्रमित मिले थे। देखते ही देखते आंकड़ा 1 लाख, 2 लाख और 3 लाख के स्तर को पार करते हुए 4 लाख के करीब पहुंच गया। आंकड़े स्थिति की भयावहता बता रहे हैं। अप्रैल के पहले दिन देश में
5,84,055 एक्टिव मरीज थे, यह आंकड़ा आज बढ़कर 31.70 लाख हो गया। मा‍त्र 30 दिन में 66 लाख से ज्यादा नए कोरोना संक्रमित मिले हैं।

30 दिन में 45000 से ज्यादा की मौत : यदि हम सिर्फ अप्रैल महीने की बात करें तो 1 तारीख को मौत का आंकड़ा 459 था, जबकि 30 मार्च आते-आते यह ग्राफ चढ़कर 3,498
तक पहुंच गया। पूरे महीने मौत के आंकड़ों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई, कुछेक दिन ही ऐसे रहे जब मौत का आंकड़ा पिछले दिन से कम रहा। 5 अप्रैल को पहली बार 500 लोगों की मौत हुई थी देखते ही देखते 28 अप्रैल तक यह आंकड़ा 3 हजार के पार हो गया। 29 अप्रैल को सबसे ज्यादा सबसे ज्यादा 3645 लोगों की मौत हुई थी। अप्रैल के 30 दिनों में देश में 45403 लोग मारे जा चुके हैं।

78.18 फीसदी मामले 11 राज्यों से : देश में उपचाराधीन मामलों में से 78.18 प्रतिशत मामले 11 राज्यों- महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, केरल, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और बिहार-में सामने आए हैं।पिछले 24 घंटे में 19 लाख से अधिक (19,20,107) नमूनों की जांच की गई है। देश में यह एक दिन में की गई सर्वाधिक जांच हैं।

भारी पड़े चुनाव : कोरोना काल में 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के साथ ही देश के कई राज्यों में हुए उप चुनाव और पंचायत चुनाव भी भारी पड़ गए। चुनाव काल में ही पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में कोरोना मामलों में भारी तेजी देखी गई। इस दौरान कई उम्मीदवार कोरोना संक्रमित हो गई तो कई की कोरोना की वजह से जान चली गई।

ऑक्सीजन, बेड्स और इंजेक्शन की जंग : अप्रैल में देशभर में कोरोना मरीजों और उनके परिजनों को ऑक्सीजन, बेड्स और इंजेक्शन की कमी का सामना करना पड़ा। ऑक्सीजन की कमी से अस्पताल बेबस हो गए, लोग सड़कों पर ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर भटकते रहे। सांसों के संकट से जुड़ते लोगों को ना तो इंजेक्शन मिल रहे थे और ना ही उनके लिए बेड्स की व्यवस्था थी।

देखते ही देखते मरीजों को मदद से लिए देश विदेश से युद्ध स्तर पर प्रयास शुरू हो गए। अमेरिका, रूस, ब्रिटेन समेत दुनिया के कई देशों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाएं।

वैक्सीनेशन संकट : महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, उड़िसा समेत कई राज्यों में इस माह लोगों को वैक्सीनेशन के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए लोग भटकते रहे और अस्पतालों के बाहर नो वैक्सीन की तख्तियां लटकती दिखाई दी। इस बीच केंद्र सरकार ने 1 मई से 18 प्लस लोगों के लिए वैक्सीनेशन का ऐलान रजिस्ट्रेशन भी शुरू कर दिए। लेकिन टीकों की कमी की वजह से कई राज्यों ने हाथ खड़े कर दिए।



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