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Buddha Purnima 2020: वैशाख पूर्णिमा आज, जानिए पूजा विधि और महत्‍व और मान्यताएं

गुरुवार,मई 7, 2020
Buddha Purnima Special
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बुद्ध को महात्मा या स्वामी कहने वाले उन्हें कतई नहीं जानते। बुद्ध सिर्फ बुद्ध जैसे हैं। अवतारों की कड़ी में बुद्ध अंतिम हैं। उनके बाद प्रलयकाल तक कोई अवतार नहीं होने वाला है।
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एक बार भगवान बुद्ध अपने अनुयायियों के साथ किसी गांव में उपदेश देने जा रहे थे। उस गांव से पूर्व ही मार्ग में उन लोगों को जगह-जगह बहुत सारे गड्ढे़ खुदे हुए मिले।
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हिन्दू धर्मावलंबियों के लिए बुद्ध विष्णु के नौवें अवतार हैं। अतः हिन्दुओं के लिए भी बुद्ध पूर्णिमा का दिन पवित्र माना जाता है।
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बांग्लादेश, पाकिस्तान, मलेशिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर और अफगानिस्तान में बौद्धों पर हुए अत्याचार के चलते वहां इनकी संख्या कम हो चली है। आओ जानते हैं गौतम बुद्ध के बारे में 25 खास जानकारियां।
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7 मई 2020 को बुद्ध जयंती हैं। बुद्ध यानी सिद्धार्थ का जन्म नेपाल की तराई के लुम्बिनी वन में ईसा पूर्व कपिलवस्तु के महाराजा शुद्धोदन की धर्मपत्नी महारानी महामाया देवी के घर हुआ था।
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बिहार में एक जिला है जिसका नाम वैशाली है। विश्‍व को सर्वप्रथम गणतंत्र का पाठ पढ़ने वाला स्‍थान वैशाली ही है। यहां की नगरवधू आम्रपाली और यहां के राजाओं के किस्से इतिहास में भरे पड़े हैं। एक खूबसूरत लड़की से नगरवधु बनने और उसके बाद भिक्षुणी बन जाने की ...
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बौद्ध धर्म का यह चमत्कारी मंत्र सभी प्रकार के खतरों से सुरक्षा के लिए जपा जाता है। यह निम्न षडाक्षरीय मंत्र आने वाले हर संकटों से सुरक्षित रखता है। इस षडाक्षरीय मंत्र का उल्लेख अवलोकितेश्वरा में किया गया है। पढ़ें मंत्र-
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हिन्दू धर्मावलंबियों के लिए बुद्ध विष्णु के नौवें अवतार हैं। अतः हिन्दुओं के लिए भी यह दिन पवित्र माना जाता है।
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भगवान बुद्ध का धर्म पूर्व के कई राष्ट्रों का धर्म है। जिसमें जापान, दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, चीन, वियतनाम, ताइवान, थाईलैंड, कंबोडिया, हांगकांग, मंगोलिया, तिब्बत, भूटान, मकाऊ, बर्मा, लागोस और श्रीलंका तो बौद्ध राष्ट्र है ही साथ ही भारत, नेपाल, ...
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कपिलवस्तु के महाराजा शुद्धोदन की धर्मपत्नी महारानी महामाया देवी की कोख से नेपाल की तराई के लुम्बिनी वन में जन्मे सिद्धार्थ ही आगे चलकर बुद्ध कहलाए।
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बुद्ध को महात्मा या स्वामी कहने वाले उन्हें कतई नहीं जानते। बुद्ध सिर्फ बुद्ध जैसे हैं। अवतारों की कड़ी में बुद्ध अंतिम हैं।
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स्वयं के होने को जाने बगैर आत्मवान नहीं हुआ जा सकता। निर्वाण की अवस्था में ही स्वयं को जाना जा सकता है। मरने के बाद आत्मा महा सुसुप्ति में खो जाती है।
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गौतम बुद्ध ने जितने हृदयों की वीणा को बजाया है उतना किसी और ने नहीं। गौतम बुद्ध के माध्यम से जितने लोग जागे
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किसी के प्रति मन में बुरी भावना लाना आदि। इसे सामान्यतः बहुत ही मामूली बात समझा जाता है। परंतु वास्तव में यह मूल्यांकन गलत है।
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लुम्बिनी नेपाल के तराई क्षेत्र में कपिलवस्तु और देवदह के बीच नौतनवा स्टेशन से 8 मील दूर पश्चिम में रुक्मिनदेई नामक स्थान है, जहां बुद्ध का जन्म हुआ था।
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महात्मा गौतम बुद्ध कहते हैं कि- अतीत पर ध्यान मत दो, भविष्य के बारे में मत सोचो, अपने मन को वर्तमान क्षण पर केंद्रित करो।
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भगवान बुद्ध ने एक मध्यम मार्ग खोज निकाला, जिसे अष्टांगिक मार्ग कहते हैं। यह मार्ग शांति, ज्ञान और निर्वाण देने वाला है।
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भगवान बुद्ध ने अपने हाथ से कुछ नहीं लिखा था। उनके उपदेशों को उनके शिष्यों ने पहले कंठस्थ किया, फिर लिख लिया। वे उन्हें पेटियों में रखते थे।
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भगवान बुद्ध का जीवन और उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। बुद्ध के प्रेरणादायक जीवनदर्शन का जन-जीवन पर अमिट प्रभाव रहा है। आइए जानते हैं वे कौन-सी चार छटनाएं थी, जो सिद्धार्थ को संसार में बांधकर न रख सकीं। आइए जानें...
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