दिग्गज भी नहीं पहुंचा पाए 'अपनों' को विधानसभा

Last Updated: शुक्रवार, 13 नवंबर 2020 (16:22 IST)
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बिहार विधानसभा चुनाव (bihar assembly election 2020) में इस बार कई नेताओं के रिश्तेदार जहां विधानसभा पहुंचने में सफल रही, वहीं कई ऐसे भी प्रत्याशी रहे जो दिग्गज रिश्तेदार नेताओं की बावजूद विधानसभा की सीढ़ियां नहीं चढ़ पाए।

कहलगांव सीट से 9 बार विजय पताका फहरा चुके पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सदानंद सिंह के बदले इस बार कांग्रेस ने उनके पुत्र को पहली बार आजमाया, लेकिन भाजपा के पवन कुमार यादव के हाथो उनकी करारी शिकस्त हो गई।

बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस ने बॉलीवुड के शॉटगन शत्रुघ्न सिन्हा के पुत्र लव सिन्हा पर दांव लगाया, जिन्हें भाजपा के नितिन नवीन ने शिकस्त दे दी। लव सिन्हा जनता का प्यार (लव) पाने में असफल रहे तो वहीं नितिन नवीन ने लगातार तीसरी बार विजय हासिल करते हुए हैट्रिक मारी है। इसी सीट पर पहली बार चुनाव लड़ीं जदयू नेता विनोद चौधरी की पुत्री और खुद को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बताने वाली प्लूरल्स पार्टी की संस्थापक पुष्पम प्रिया चौधरी कोई कमाल न दिखा सकीं और उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा।

मुंगेर जिले की तारापुर सीट से राजद के टिकट पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री जयप्रकाश नारायण यादव की पुत्री अपनी आभा बिखरने में असफल रही। पहली बार सत्ता के संग्राम में बाजी खेलने उतरी दिव्या प्रकाश को जदयू प्रत्याशी डॉ. मेवालाल चौधरी से हार का सामना करना पड़ा।

बिहारीगंज विधानसभा सीट से बिहार की सियासत के दिग्गज नेता माने जाने वाले पूर्व सासंद शरद यादव की पुत्री सुभाषिनी महागठबंधन की ओर से कांग्रेस के टिकट पर अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की, लेकिन जदयू के निरंजन कुमार मेहता ने कांग्रेस प्रत्याशी की जीत की उम्मीद को चूर कर दिया। महुआ सीट से जीत की अभिलाषा लेकर राजद के वरिष्ठ नेता इलियास हुसैन की पुत्री आसमा परवीन ने जदयू के टिकट पर बाजी खेली, लेकिन उन्हें राजद के मुकेश कुमार रौशन ने मात दे दी।

मधेपुरा विधानसभा सीट से (जदयू) के टिकट पर मंडल आयोग के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल के पौत्र निखिल मंडल को राजद प्रत्याशी और पूर्व मंत्री चंद्रशेखर से हार का सामना करना पड़ा। इसी सीट पर प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन (प्रलोग) के मुख्यमंत्री पद उम्मीदवार और जन अधिकार पार्टी (जाप) सुप्रीमो राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की भी यहां दाल नहीं गली।

मखदूमपुर (सु) विधानसभा क्षेत्र से हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के टिकट पर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के दामाद इंजीनियर देवेंद्र कुमार मांझी चुनावी रणभूमि में उतरे जिन्हें राजद प्रत्याशी सतीश कुमार से हार का सामना करना पड़ा। परसा विधानसभा सीट जदयू की टिकट पर उतरे पूर्व मुख्यमंत्री स्व. दारोगा प्रसाद राय के पुत्र और लालू प्रसाद यादव के समधी चंद्रिका राय को भी राजद ने छोटे लाल राय से हार का सामना करना पड़ा है।

वजीरगंज सीट से कांग्रेस ने वर्ष 2015 में जीते अवधेश सिंह के बेटे डॉ. शशि शेखर को लांच किया, जिन्हें भाजपा के पुराने सिपाही और पूर्व विधायक वीरेंद्र सिंह से हार का सामना करना पड़ा। ढाका सीट से पूर्व राज्यसभा सांसद मोतीउर रहमान के पुत्र फैसल रहमान ने राजद के टिकट पर चुनाव लड़ा, जिन्हें भाजपा के पवन कुमार जायसवाल ने शिकस्त दे दी।

गोपालगंज विधानसभा सीट से सियासी पिच पर जीत की ‘हैट्रिक’ जमा चुके (भाजपा) के सुभाष सिंह इस बार सियासी पिच पर ‘चौका’ जड़ दिया। उन्होंने लालू प्रसाद यादव के साले और पूर्व मुख्यंमंत्री राबड़ी देवी के भाई बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के अनिरुद्ध प्रसाद उर्फ साधु यादव को मात दे दी। इसी सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर के पौत्र आसिफ गफूर जीत की लालसा लिए चुनावी रण में उतरे लेकिन उनके हाथ निराशा ही लगी।



रोसड़ा (सुरक्षित) सीट से लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) अध्यक्ष चिराग पासवान के चचेरे भाई और समस्तीपुर के सांसद प्रिंस राज के बड़े भाई कृष्ण राज चुनावी दंगल में किस्मत आजमाने उतरे, लेकिन इस सीट पर उनका राज कायम नही हुआ। इस सीट पर भाजपा के वीरेन्द्र कुमार ने कांग्रेस के नागेन्द्र कुमार विकल को पराजित कर दिया।
सहरसा विधानसभा सीट पूर्व सांसद और राजद प्रत्याशी लवली आनंद को भाजपा के आलोक रंजन को चुनावी रणक्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा। महिषी विधानसभा सीट से वर्ष 2015 के चुनाव में जीते बिहार के पूर्व अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री के पुत्र अब्दुर्रज्जाक ने लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन कामयाबी नहीं मिली। राजापाकड़ (सु) सीट से लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान के जीजा धनंजय कुमार चुनावी रणभूमि में कोई कमाल नहीं दिखा सके।




पारू विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री और सांसद उषा सिंह और पूर्व विधायक वीरेन्द्र कुमार सिंह के पुत्र अनुनय सिन्हा चुनावी रण में भाग्य आजमाया, लेकिन यहां मुख्य मुकाबला जीत की हैट्रिक लगा चुके भाजपा के अशोक कुमार सिंह और पूर्व विधायक मिथिलेश प्रसाद यादव के भतीजे निर्दलीय प्रत्याशी शंकर प्रसाद के बीच देखने को मिला। भाजपा के सिंह ने निर्दलीय प्रसाद को पराजित कर चुनावी चौका लगा दिया।

लालगंज सीट से नगालैंड के पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार और पूर्व बाहुबली विधायक विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थी। कांग्रेस के टिकट पर निखिल कुमार के भतीजे राकेश कुमार पहली बार चुनावी पारी का आगाज किया लेकिन उन्हें सरकारी सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले भाजपा के संजय सिंह ने चुनावी दंगल में चित कर दिया।

सकरा सीट से पूर्व मंत्री रमई राम की पुत्री गीता कुमारी ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन उनसे भी कामयाबी कोसों दूर रही। इसी तरह गायघाट विधानसभा सीट से वैशाली की सांसद वीणा देवी और विधान पार्षद दिनेश सिंह की पुत्री कोमल सिंह लोजपा के टिकट पर चुनावी रणभूमि में उतरीं, लेकिन उन्हें भी कामयाबी मयस्सर नहीं हुई। छपरा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के डॉ. सीएन गुप्ता ने पूर्व सासंद प्रभुनाथ सिंह के पुत्र और राजद प्रत्याशी रणधीर कुमार सिंह को चुनावी दंगल में धूल चटा दी।

वहीं, रुन्नीसैदपुर सीट पर जदयू के पंकज कुमार मिश्रा ने पूर्व विधायक स्वर्गीय भोला राय की बहू और राजद उम्मीदवार मंगीता देवी के जीत के अरमानों को ध्वस्त कर दिया। घोसी सीट से जीत के प्रति आश्वस्त पूर्व सांसद जगदीश शर्मा के पुत्र राहुल कुमार को भी हार का सामना करना पड़ा है।



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