गणेश जी और उनकी प्रिय दूर्वा, पढ़ें 10 विशेष बातें

6. जैसे समिधा एकत्र बांधते हैं, उसी प्रकार दूर्वा को भी बांधते हैं। ऐसे बांधने से उनकी सुगंध अधिक समय टिकी रहती है। उसे अधिक समय ताजा रखने के लिए पानी में भिगोकर चढ़ाते हैं। इन दोनों कारणों से गणपति के पवित्रक बहुत समय तक मूर्ति में रहते हैं।

7. गणेशजी पर तुलसी कभी भी नहीं चढ़ाई जाती। कार्तिक माहात्म्य में भी कहा गया है कि 'गणेश तुलसी पत्र दुर्गा नैव तु दूर्वाया' अर्थात गणेशजी की तुलसी पत्र और दुर्गाजी की दूर्वा से पूजा नहीं करनी चाहिए।

8. भगवान गणेश को गुड़हल का लाल फूल विशेष रूप से प्रिय है। दूर्वा के साथ इस
फूल को चढ़ाने से हर कामना शीघ्र पूरी होती है।

9. इसके अलावा चांदनी, चमेली या पारिजात के फूलों की माला दूर्वा के साथ बनाकर पहनाने से भी गणेश जी प्रसन्न होते हैं।

10. गणपति का वर्ण लाल है, उनकी पूजा में लाल वस्त्र, लाल फूल व रक्तचंदन का प्रयोग किया जाता है। दूर्वा की नाजुक पत्तियां गणेश जी के पेट पर रखने से हर व्याधि में आराम मिलता है।




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