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Guru Pushya Yoga 2026: गुरु पुष्य योग में पूजा और खरीदी का शुभ मुहूर्त और महत्व
Guru Pushya Yoga muhurat: ज्योतिष शास्त्र में गुरु पुष्य योग को सभी योगों का राजा यानी नक्षत्र सम्राट माना जाता है। जब गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग बनता है, तो इसे 'गुरु पुष्य अमृत योग' कहते हैं। यह समय आध्यात्मिक सिद्धि और स्थायी संपत्ति जैसे- सोना, भूमि, वाहन की खरीदारी के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। आज गुरु-पुष्य योग के साथ ही सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग में गंगा सप्तमी का पर्व भी मनाया जा रहा है।ALSO READ: ganga saptami katha: गंगा सप्तमी की पौराणिक कथा
वर्ष 2026 में आज 23 अप्रैल को ही साल का पहला गुरु पुष्य योग बन रहा है। यहां इसका शुभ मुहूर्त और महत्व की पूरी जानकारी दी गई है:
गुरु पुष्य योग 2026 के शुभ मुहूर्त
इस साल यह दुर्लभ संयोग 23 अप्रैल 2026, बृहस्पतिवार को बन रहा है।
गुरु पुष्य योग का प्रारंभ समय- 23 अप्रैल 2026 को रात 08:57 बजे से
समाप्ति समय- 24 अप्रैल, सुबह 05:47 बजे तक रहेगा।
इस समयावधि में आप सोना-चांदी, प्रॉपर्टी, वाहन, धार्मिक वस्तुएं आदि की खरीदारी कर सकते हैं या निवेश भी कर सकते हैं।
क्या खरीदें?
पुष्य नक्षत्र के स्वामी 'शनि' हैं और इसके देवता 'बृहस्पति' हैं। शनि स्थायित्व देते हैं और गुरु समृद्धि, इसलिए इस योग में किया गया कोई भी कार्य लंबे समय तक शुभ फल देता है।
सोना-चांदी: इस दिन स्वर्ण खरीदना अत्यंत शुभ है। माना जाता है कि गुरु पुष्य में खरीदा गया सोना घर में लक्ष्मी का स्थायी वास कराता है।
निवेश: नए व्यापार की शुरुआत, शेयर बाजार में निवेश या बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट शुरू करने के लिए यह 'अक्षय' मुहूर्त है।
प्रॉपर्टी और वाहन: भूमि, भवन या नया वाहन खरीदने के लिए यह दिन सर्वोत्तम है।
धार्मिक वस्तुएं: यदि आप कोई नया यंत्र- जैसे श्रीयंत्र, दक्षिणावर्ती शंख या धार्मिक पुस्तकें खरीदना चाहते हैं, तो यह समय श्रेष्ठ है।ALSO READ: Ganga Saptami 2026: गंगा सप्तमी का धार्मिक महत्व, परंपरा और दान
गुरु पुष्य योग का धार्मिक महत्व
गुरु पुष्य योग एक अत्यंत शुभ और लाभकारी योग है जो वैदिक ज्योतिष में विशेष महत्व रखता है। यह योग तब बनता है जब गुरु ग्रह (बृहस्पति) पुष्य नक्षत्र में स्थित होता है। इसे ज्ञान, समृद्धि, और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। इस दिन किए गए धार्मिक कार्य, पूजन, दान और खरीदारी विशेष फलदायी माने जाते हैं।
गुरु पुष्य योग के दिन पूजा, हवन, और मंत्र जप अत्यंत फलदायक होते हैं। इस दिन धन-सम्पत्ति के लिए पूजन और हवन करना बहुत शुभ माना गया है। यह अवसर गृहस्थ जीवन में सुख और सौभाग्य बढ़ाने वाला होता है तथा बच्चों की शिक्षा, ज्ञान प्राप्ति और वैवाहिक जीवन में शुभता प्राप्त की जा सकती है। इसलिए, वैदिक परंपरा में गुरु पुष्य योग के दिन किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करना अत्यंत लाभकारी माना गया है।
पूजा विधि और उपाय
इस विशेष योग का पूरा लाभ उठाने के लिए आप निम्नलिखित पूजा कर सकते हैं:
महालक्ष्मी और श्री हरि की पूजा: केसर मिश्रित दूध से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का अभिषेक करें। 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद' मंत्र का जाप करें।
गुरु ग्रह की शांति: यदि कुंडली में गुरु कमजोर है, तो पीले वस्त्र पहनें और चने की दाल या केसर का दान करें।
बहीखाता पूजन: व्यापारी वर्ग इस दिन अपने नए खातों या कलम की पूजा करते हैं।
पीपल की पूजा: पुष्य नक्षत्र का प्रतीक वृक्ष 'पीपल' है। शाम को पीपल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाने से सुख-समृद्धि बढ़ती है।
विशेष नोट: गुरु पुष्य योग को विवाह के लिए शुभ नहीं माना जाता है, क्योंकि पुष्य नक्षत्र को ब्रह्मा जी का श्राप है कि इसमें विवाह संस्कार वर्जित रहेंगे। बाकी सभी आर्थिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए यह वरदान के समान है।
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