मेरे अश्कों ने दिया
मेरे अश्कों ने दिया रुतबा मुझे इंसान होने का,
ग़म से पत्थर हो गया होता अगर रोता नहीं।
अज़ीज़ अंसारी
अश्कों----आंसूओं
रुतबा----सम्मान, पद
ग़म से पत्थर हो गया होता अगर रोता नहीं।
अज़ीज़ अंसारी
अश्कों----आंसूओं
रुतबा----सम्मान, पद
