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Written By WD

मुसलमाँ बन न सका

मुसलमाँ न आज का शेर sher mosque
मस्जिद तो बना ली शब भर में ईमाँ की हरारत वालों ने
दिल अपना पुराना पापी है बरसों में मुसलमाँ बन न सका----- इक़बाल

शब ------रात
ईमाँ की हरारत -----ईमान-धरम का जोश