गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026
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Written By WD

मुन्ने चल, चलाचल!

मुन्ना चलाचल
पत्नी : 'तुम्हें कुछ खबर भी है? अरे, हमारे मुन्ने ने चलना भी शुरू कर दिया है।'
दार्शनिक पति : 'अच्छा! कब से?'
पत्नी : 'दस दिन हो गए।'
पति : 'अरे! तो उसे पकड़ो! अब तक तो बहुत दूर निकल गया होगा, शैतान।'

वाह साहबजादे!
पन्नूजी, बेटे के साथ चीनी लेने दुकान पर पहुँचे।
दुकानदार बोला- 'चीनी तो आउट ऑफ स्टॉक
है।'

यह सुन बेटे ने पूछा- 'पापा! आउट ऑफ स्टॉक का क्या मतलब?'
पन्नू जी ने बताया- 'बेटे! कोई चीज जब मौजूद न हो तो उसे आउट ऑफ स्टॉक कहा जाता है।'
खैर, दोनों घर पहुँचे तभी किसी ने बाहर से आवाज दी।
पन्नूजी ने बेटे से कहा- 'कह दे पापा घर में नहीं हैं।'
साहबजादे ने बाहर जाकर फरमाया- 'अंकल! मेरे पापा आउट ऑफ स्टॉक हैं।

ले बेटा!
माँ : 'पप्पू बेटे रो क्यों रहे हो?'
पप्पू : 'पापा कीचड़ में गिर गए।'
माँ : 'अरे तो रोना कैसा? तुम्हें तो हँसना चाहिए।'
पप्पू : 'मैं पहले हँसा ही तो था।'

पराठा चिंतन!
देहरादून जा रही बस में एक लड़का बार-बार उठकर कंडक्टर से पूछता- 'क्योंजी! क्या मेरठ आ गया?'
तंग आकर कंडक्टर ने पूछ ही लिया- 'तुम्हें तो देहरादून उतरना है.... फिर ये मेरठ-मेरठ की रट क्यों लगा रखी है?'
लड़का बोला- 'इसलिए बाबू, कि मेरी मम्मी ने मेरे साथ भरवाँ पराठे बाँधे हैं और कहा है कि जब मेरठ आ जाए तो मैं इन्हें खा लूँ।'