मप्र की बसों में जीपीएस
25 करोड़ रु. खर्च होने का अनुमान
ग्वालियर। मध्य प्रदेश की सड़कों पर जल्द ही ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस) से लैस बसें दौड़ती नजर आएँगी। मप्र के इस प्रोजेक्ट को केंद्र ने मदद देने पर सहमति दे दी है। इस पर करीब 25 करोड़ रु. खर्च होने का अनुमान है।प्रोजेक्ट के तहत परिवहन महकमा उन सभी बसों को जीपीएस से लैस करेगा, जो महकमे से परमिट लेकर प्रदेश के विभिन्न रूटों पर दौड़ रही हैं। प्रोजेक्ट को लेकर महकमे के आला अधिकारियों ने शुक्र वार को ही केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के सामने परेड की थी। प्रदेश के अंदर मौजूदा समय में करीब तेरह हजार यात्री बसें संचालित हैं, जो अलग-अलग रूटों पर दौड़ रही हैं। इनमें से बड़ी संख्या में ऐसी भी बसें हैं, जिनके पास परमिट किसी रूट का है और वे संचालित हो रही हैं किसी दूसरे रूट पर। जीपीएस लग जाने के बाद प्रदेश के अंदर दौड़ने वाली उन सभी बसों पर नजर रखी जा सकेगी, जो मौजूदा समय में परमिट लेकर प्रदेश के विभिन्न रूटों पर दौड़ रही हैं। यह भी सुनिश्चित किया जा सकेगा कि परमिट लेने वाली बस अपने निर्धारित रूट और फेरों पर ही संचालित हो रही हैं या नहीं। इसके साथ ही बसों के इंतजार में बस स्टैंडों पर पहुँच रहे यात्रियों को भी उसके आने का सही समय पता चल सकेगा।