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Written By WD

सहवाग बने मीरपुर के 'मीर'

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सीमान्त सुवी

PTI
वीरेन्द्र सहवाग को पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच में तिहरा शतक जमाने के बाद 'नजफगढ़ के नवाब' की पदवी मिली थी, लेकिन शनिवार को उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ वर्ल्डकप के पहले ही मैच में आतिशी पारी खेलकर 'मीरपुर का मीर' कहलाने का हक प्राप्त कर लिया।

चोट के बाद सहवाग ने जब भी मैदान संभाला है, वे 'जाँबाज सहवाग' के रूप में छा जाते हैं। ऐसा ही कुछ नजारा उन्होंने मीरपुर के शेरे बांग्ला स्टेडियम में दिखाया। उनकी विस्फोटक पारी के कारण आलम ये था कि स्टेडियम में जमा हजारों दर्शक मन ही मन सहवाग के बल्ले से निकल रहे रनों के झरने में खुद को तभिगो हरहे थे, लेकिन उनका मुरझाया हुआ चेहरा साफ बता रहा था कि वे अपने गेंदबाजों से कितने ज्यादा निराश हैं। हालाँकि कई मौकों पर उन्होंने सहवाग के स्ट्रोक को 'सलाम' भी किया।

बांग्लादेश के तेज गेंदबाज रूबेल हुसैन, अब्दुर रज्जाक के अलावा ऑलराउंडर कप्तान शकीब अल हसन, नईम इस्लाम और मेहमूदुल्ला में से कोई भी सहवाग के बल्ले पर अंकुश नहीं लगा पा रहा था। यदि आउटफील्ड तेज होती तो सहवाग के खाते में और न जाने कितने चौके जमा हो जाते। यहाँ पर एक बात याद रखना जरूरी है ‍क‍ि बांग्लादेश के कप्तान शकीब आईसीसी की वर्तमान ऑलराउंडर की सूची में 436 अंकों के साथ शीर्ष स्थान पर हैं, लेकिन वे भी सहवाग नाम के तूफान के आगे बेबस नजर आ रहथे।

सहवाग ने अपनी पारी में जैसे ही 146 रन का आँकड़ा पार किया, वे वनडे में अपने हसर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से आगे बढ़ गए। एक समय ऐसा भी आया जब सहवाग को गेंद टेनिस की बॉल की तरह लग रही थी और वे उस पर रॉजर फेडरर की तरह लगातार 'हिट' किए जा रहे थे। सहवाग जब 175 रन के निजी स्कोर पर थे, तब शकीब की इनकटर गेंउनके बल्ले का भीतरी किनारा लेतहुए स्टंप ले उड़ी।

सहवाग जैसे ही आउट हुए स्टेडियम में इतना अधिक शोर हुआ, तब लगा कि वाकई विश्वकप का यहाँ मैच हो रहा है। वरनउसकपहलसहवाआतिशपारजादरखा, जिसकवजदर्शशांथे।

सहवाग बतौर सलामी बल्लेबाज के रूप में मैदान में उतरे और 48वें ओवर में जाकर आउट हुए। उन्होंने अपनी 175 रनों की पारी में 14 चौकों के अलावा 5 छक्के भी उड़ाए। यकीन मानिए कि सहवाग के बल्ले से इस तरह की पारी खुशकिस्मत लोगों की आँखों को ही नसीब होती है। सहवाग ने तीसरे विकेट के लिए विराट कोहली को साथ लेकर 203 रनों की साझेदारी भी निभाई, जिसने स्कोर को 300 के पार लगाया।

विश्वकप जब तक शुरू नहीं हुआ था, बांग्लादेश के कप्तान शकीब जोश से भरे हुए थे। इसकी वजह यह भी थी कि 2010 में उनकी टीम ने न्यूजीलैंड को वनडे सिरीज में 4-0 से और जिम्बॉब्वे को 3-1 से हराया था। इसके अलावा यही वो टीम थी, जिसने भारत को 2007 के विश्वकप में घर वापसी का टिकट दिलवाया था और उसी विश्वकप में ये टीम उलटफेर करते हुए दक्षिण अफ्रीका को हराकर सुपर 8 में पहुँची थी।

इस तरह का शानदार अतीत रखने वाली बांग्लादेश टीम का टीम इंडिया के जाँबाज ये हश्र करेंगे, इसका खयाल किसी के दिमाग में नहीं आया था। दरअसल पूरी टीम पिछली हार की खुन्नस इस मैच में बराबर करना चाहती थी। सहवाग ने मैदान के सभी कोणों पर दर्शनीय चौके और छक्के लगाए। फ्रंटफुट पर आते ही लग जाता था कि गेंद सीमा पार जाने वाली है।

सहवाग के आगे सभी बांग्लादेश के गेंदबाजों ने अपने हथियार डाल दिए थे। सच कहा जाए तो 19 फरवरी को सहवाग का दिन था। 'ब्लू ब्रिगेड' के इस सिपाही पर पूरा देश नाज करता है और इस विश्वकप में तो उनसे उम्मीदें और बढ़ती जा रही हैं। आगे-आगदेखिसहवाबल्लभारतीउपमहाद्वीबेजाविकेटोकैसकहबरपातहैसहवादेखकजुबायहनिकलति 'बंदे में है दम, वंदेमातरम'।
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