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विश्वकप का चढ़ा बुखार

विश्वकप
10वें विश्वकप क्रिकेट टूर्नामेंट के शुरु होने में अब चंद घंटों का समय बाकी रह गया है और भारत के दो अभ्यास मैचों ने क्रिकेटप्रेमियों में नया जोश भर दिया है।
Girish Srivastava
WD

क्रिकेट के बुखार का ये आलम है कि मैदान पर जहाँ क्रिकेट की जंग में जाँबाज अपना पसीना बहा रहे हैं तो भारत को विश्वविजेता बनने के लिए दुआओं का सिलसिला भी प्रारंभ हो गया है। यहाँ तक कि युवराजसिंह की माँ जहाँ आंग्ल दैनिक में कॉलम लिख रही हैं तो दूसरी तरफ सहवाग की माँ भगवान से प्रार्थना करने में लगी हैं।

आम क्रिकेटप्रेमियों का ये हाल है कि मुंबई ‍के सिद्धविनायक मंदिर में विश्वकप की बड़ी से प्रतिकृति ले जाई गई और पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक उज्जैन के महाकाल मंदिर में भी अभिषेक किया गया। यहाँ भी बच्चों से लेकर बड़ों तक ने भारतीय क्रिकेट टीम की सफलता की कामना की।

हरिद्वार में व्यापारियों ने पूजा अर्चना के साथ गंगा घाट पर दूध के साथ गंगा का अभिषेक किया, वहीं मनसा देवी के मंदिर में भारतीय टीम के विश्वकप जीतने की दुआ माँगी गई। भोपाल में स्कूली ने बच्चों ने 16 फीट लंबे बैट पर भारतीय टीम के लिए अपने शुभकामना संदेश लिखे। लखनऊ मे एक मदरसे में बच्चों ने टीम इंडिया के लिए दुआ के लिए हाथ उठाए।

Girish Srivastava
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क्रिकेट का बुखार लोगों के सिर किस तरह चढ़कर बोलने लगा है, इसका अंदाज आप इसी से लगा सकते हैं कि कुछ क्रिकेट के दीवानों ने अपने बाल कुछ इस तरह मुँडवाए हैं ताकि पीछे से वर्ल्डकप नजर आए। बीकानेर में कुछ क्रिकेट दीवानों ने अपने पूरे शरीर पर विश्वकप की चित्रकारी करवाई तो पांडिचेरी में कुछ लोगों ने चॉकलेट का विश्वकप बनाया।

इलाहाबाद के स्टंटमैन शशिधर विश्वकप के दौरान बाइक पर 51 शहरों का दौरा करेंगे। इस बार विश्वकप में पंजाब का बिगुल बजने वाला है। विश्वकप फुटबॉल की तर्ज पर पंजाब के मनप्रीत वालिया के दिमाग में आया कि क्यों न इस मौके पर वुवुजेला वाद्य यंत्र बनाया जाए, लिहाजा यहाँ उन्होंने बड़ी मात्रा में वुवुजेला बनाई है।

चेहरों पर तिरंगा रंग पोतकर भारतीय क्रिकेटप्रेमी अपनी तरफ से शुभकामनाएँ देने की परंपरा पुरानी है, अब वे चाह रहे हैं कि किसी भी तरह अपने वतन के खिलाड़ियों की हौसला अफजाई में वे अलग दिखें।

आश्चर्य तो इस बात का है कि लड़कों के साथ ही लड़कियों पर भी क्रिकेट का रोमांच छा गया है और इसका प्रमाण तब देखने को मिला, जब बेंगलुरु और चेन्नई में जब भारत ने क्रमश: ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को हराया तो लड़कियाँ खुशी से पागल हुई जा रही थी। उन्हें ये मैच अभ्यास के बजाय विश्वकप का मैच लग रहा था।

बहरहाल, पूरा देश दुआ कर रहा है कि भारत 28 साल भारत अपनी सरजमीं पर विश्वकप जीते। अभ्यास मैचों में धोनी की सेना ने जो प्रदर्शन किया, उसने क्रिकेटप्रेमियों के इस बुखार को कई डिग्री और बढ़ा दिया है। (वेबदुनिया न्यूज)